कैसा है आपके लिए 'मीन' राशि के बृहस्पति का आगमन (jupiter's transit into pisces)--(2)

विगत सप्ताह दिनाँक 6 दिसंबर को देवगुरू बृहस्पति का पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण और मीन राशि में प्रवेश हुआ है. मीन राशि जो कि बृहस्पति ग्रह की अपनी स्वयं की राशि है. 8 मई 2011 तक वो इस राशि में ही संचार करेंगें. इस समय मीनस्थ बृहस्पति पर शनि ग्रह की पूर्ण दृष्टि भी पड रही है.वैश्विक तौर पर धार्मिक,राजनैतिक एवं न्यायिक पक्ष पर बृहस्पति का प्रभाव विशेष रूप से देखने को मिलेगा.6 जनवरी 2011 को गुरू के उतराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश के पश्चात व्यवसायिक पक्ष में कृषि सम्बन्धी उत्पादों के मूल्यों में बढोतरी एवं विलासिता की साम्रगी में नरमी का दौर भी देखने को मिलेगा. जनवरी 6 से 13 के मध्य राष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रमुख व्यक्ति के निधन से शोक व्याप्त होने एवं पश्चिमोतर दिशा में कहीं भूकम्प इत्यादि प्राकृतिक आपदा अथवा वायुयान दुर्घटना आदि से जनधनहानि का भी योग निर्मित हो रहा है.
अब जानिये कि आपके जन्म नक्षत्रानुसार बृहस्पति का आप पर किस प्रकार का प्रभाव रहेगा...
अश्विनी से स्वाती प्रयन्त नक्षत्रों के फल आप इससे पूर्व की पोस्ट से जान सकते हैं..शेष नक्षत्रों के फल आप यहाँ क्रमवार पढ सकते हैं.
विशाखा नक्षत्र:-आपके लिए बृहस्पति का मीन राशि में आगमन पूर्णत: शुभकारी है. पूर्व में चली आ रही कुछ परेशानियाँ, चिन्ताएं, उलझनें समाप्त होकर आगे का मार्ग प्रशस्त होगा. बिगडे हुए कार्य सयास बनने लगेंगें. परिवार, इष्ट-मित्र, कारोबार, नौकरी, मकान-जायदाद से सम्बंधित पुरानी चली आ रही किन्ही समस्यायों का समाधान निकल आएगा.स्वास्थय रक्षा भी कुछ सीमा तक ठीक ही रहेगी. नौकरीपेशा जातकों को अपने कार्य/स्थान परिवर्तन के बारे में सोचना कुछ समय के लिए स्थगित कर देना ही श्रेष्यकर रहेगा.
अनुराधा नक्षत्र:- इस नक्षत्र में जन्में जातकों के लिए बृहस्पति की ये स्थिति विशेषत: 4 जनवरी 2011 के पश्चात् भाग्य के अवरोधों को समाप्त करने वाली सिद्ध होगी. निज पराक्रम और व्यापार का क्षेत्र बढा-चढा रहेगा. यदि आप किसी प्रकार के व्यसन से युक्त हैं तो मन में व्यसनोन्मुक्त होने के विचार उत्पन होने लगेंगें. आपके लिए ये भाग्य द्वारा उपलब्ध कराया गया एक सुअवसर ही कहा जाएगा----बस थोडा सा इस विचार पर अडिग रहने की आवश्यकता भर है.
ज्येष्ठा नक्षत्र:- आपका ये समय चलते-फिरते रेल के इंजन की तरह रहेगा. चलते जाईये और काम निभाते जाइये तो पूरी सफलता मिलेगी, जरा सा भी रूक गये तो सारा काम चौपट हो जायेगा. मतलब यह कि इस समय आपको आलस्य और आराम से दूर रहने की आवश्यकता है,अन्यथा इस आदत की वजह से ही आप अपने कईं बने बनाए काम बिगाड बैठेंगें. दूसरों को दबाने और अपमानित करने में आप कुछ सुख का अनुभव करेंगें. इसके अतिरिक्त यात्रा में झंझट, जीवनसाथी को कष्ट,धन का खो जाना अथवा चोरी तथा गृह-भूमि-मकान के निर्माण/मुरम्मत वगैरह में धन का खर्च इत्यादि फल भी प्राप्त करेंगें.
मूल नक्षत्र:- आप लोगों को थोडा सचेत रहने की आवश्यकता है अन्यथा किसी धोखेबाज के चक्कर में फँसकर बदनामी और परेशानी मोल खरीदनी पडेगी. धर्म-कर्म में रूचि कम ही रहेगी. खर्च करने की ताकत हिम्मत से बाहर होगी. फिजूल की छोटी-मोटी यात्राएं अधिक करनी पडेंगीं. मन में सेनापतियों जैसा उत्साह,फौजियों जैसी कर्मठता, डाक्टरों जैसी कठोरता,मानसिक असंतोष और परहित चाहना इस समयावधि में आपके विशेष गुण रहेंगें. ननिहाल पक्ष की ओर से कोई अप्रिय समाचार सुनने को मिल सकता है. विद्यार्थियों एवं बेरोजगार जातकों के लिए ये समय श्रेष्ठ रहेगा. वे अपने द्वारा किए जा रहे प्रयत्नों का यथेष्ठ फल प्राप्त कर पायेंगें.
पूर्वाषाढा नक्षत्र:- अपने किसी शत्रु को शीघ्रता से क्षमा कर देना आपके स्वभाव में नहीं है, किन्तु इस समयावधि में कुछ समय के लिए अपने इस स्वभाव में परिवर्तन करना आपके लिए निहायत ही आवश्यक हो जाता है. यदि ऎसा नहीं करेंगें तो मीन राशि में भ्रमण करता ये बृहस्पति आपको वृथा ही कानूनी झगडा-झंझटों में उलझाने को तत्पर है. खर्च और आय दोनों ही उम्मीद से थोडा बढकर ही रहेंगें. दिमाग आपका स्थायी नहीं रहेगा, लडकपन जैसी विचारधारा बनी रहेगी. दौड-धूप तथा चटकार चीजें खाने का मन करेगा. स्नान-ध्यान,भोजन,सोना-उठना इत्यादि ठीक नियमित समय पर नहीं कर पाएंगें, इसी वजह से बार-बार शरीर को अस्वस्थ महसूस करेंगें.विद्यार्थियों का भी अध्ययन में पूरी तरह से मन नहीं लग पाएगा.
उत्तराषाढा नक्षत्र:-जीवन के कुछ मामलों में आपके लिए ये समय दुविधापूर्ण रहेगा. मसलन व्यापार/नौकरी अथवा विवाह इत्यादि किसी महत्वपूर्ण विषय में "करूँ-न करूँ", "हाँ-नाँ" जैसी स्थिति रहेगी. किसी अन्तिम निर्णय तक पहुँच पाने में स्वयं को असमर्थ महसूस करेंगें. इस समयावधि में दक्षिण दिशा में की गई यात्राएं लाभ का कारण सिद्ध होंगीं. जो लोग Technical कार्यों में संलग्न हैं, उनके लिए तो ये बृहस्पति सामान्य फलदायक ही रहेगा किन्तु बौद्धिक कार्यों में जुटे जातक यथेष्ठ लाभ प्राप्त कर पाएंगें. उनके लिए तरक्की/ स्थान परिवर्तन का सुयोग निर्मित हो रहा है.
श्रवण नक्षत्र:- आप लोगों को शरीर में कमर से पैर तक के किसी अंग में रोग/चोट एवं वात्तजन्य व्याधि का सामना करना पडेगा---फरवरी माह में विशेष रूप से सचेत रहें. जीवन के किसी भी विषय में स्वयं के द्वारा किए गये निर्णय पर सहज रूप से विश्वास नहीं होगा, इसलिए अलसाये मन से ही दूसरों की बात को मान लेने की प्रवृति रहेगी.आर्थिक और साम्पत्तिक मामलों में अवश्य भाग्यशाली रहेंगें.खर्च करने में कंजूसी बनी रहेगी, इसलिए उचित मात्रा में धन का संचय भी अवश्य कर पायेंगें.कागज, वस्त्र, लेखन,भाषण,पुस्तक प्रकाशन/विक्रय अथवा राजकीय कार्यों में संलग्न जातकों के लिए कुल मिलाकर समय अच्छा लाभ देने वाला रहेगा.
धनिष्ठा नक्षत्र:-मीनस्थ बृहस्पति आप लोगों के लिए सामान्य ही रहेगा. इस अवधि में किसी प्रकार का कोई विशेष कोई उतार-चढाव नहीं देखने को मिलेगा. आजीविका एवं परिवार के पक्ष में सब कुछ पूर्ववत ही रहने वाला है. किन्तु स्वभाव में थोडा चिडचिडापन,उतेजना अवश्य देखने को मिलेगी. शिक्षार्थी विद्याध्ययन में कुछ कमजोरी महसूस करेंगें. तीव्र बुद्धि होते हुए भी ग्रहण-शक्ति और स्मरण-शक्ति में थोडी परेशानी रहेगी. इस नक्षत्र में जन्मी किशोरियों को स्वेच्छित किशोर से प्रेम-प्रसंग/विवाह हेतु सफलता अवश्य प्राप्त हो जाएगी.
शतभिषा नक्षत्र:-आपकी व्यक्तिगत मनोवांछित इच्छाएं कब पूर्ण होंगीं ? इस प्रकार का उतावालपन कदाचित आपकी मानसिक स्थिति को खेदग्रस्त बनाये रखेगा. किसी स्त्री से धोखा/अपमान मिलने का योग है,वो स्त्री चाहे परिवार की हो अथवा बाहर की. दान-धर्म-दया में रूचि,अभिमानी,गुप्त बुद्धि,भोगकामना,कुटिल लोगों का साहचर्य इत्यदि फल प्राप्त होंगें. शरीर में कंधा/हाथ/फेफडा अथवा नाक का समीपवर्ती स्थान---इनमें से किसी अंग में रोग/पीडा का सामना करना पडेगा. अपने अज्ञान को दूर करने तथा उत्तम ज्ञान-शक्ति प्राप्त करने हेतु समय श्रेष्ठ है. यूँ भी कष्ट और विपत्ति ही इन्सान को शिक्षा देने वाले गुरू होते हैं. इनका उपदेश हमें आदर और श्रद्धा के साथ ही सुनना चाहिए.
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र:- इस नक्षत्र में जनम लेने वाले वकालत,इन्जीनियरिंग,डाक्टर,स्वर्णकार अथवा परिवहन सम्बन्धी किसी कार्यव्यवसाय में संलग्न जातकों के लिए बृहस्पति का मीन राशि में आगमन शुभफलदायक एवं श्रेष्ठ लाभकारी सिद्ध हो रहा है. अन्य कार्यों में लगे जातकों को भी कम-अधिक मात्रा में सुफल मिलते ही रहेंगें. जीवन-सथी का सुख-सम्बन्ध संतोषजनक रहेगा. लेकिन आपको संतान की ओर से थोडा सावधान रहना चाहिये,क्योंकि संतानपक्ष से अनिष्ठकारक योग निर्मित हो रहा है.
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र:-आप लोगों के लिए रूपये-पैसों की कमी,दुश्मनों से कष्ट,धोखा,फरेब,नुक्सान,विवशता, व्यर्थ के झगडे-झंझट तथा अनेक प्रकार के उलझनों वाला समय है. केवल कमाना खाना ही लगा रहेगा. न तो गहरी आमदनी होगी और न तो कोई मददगार सामने आएगा. किसी कार्य प्रयोजन के लिए ऋण लेने के विचार मन में जन्म लेने लगेंगें. पितृपक्ष की ओर से भी मन थोडा परेशान रहेगा. अत: इस समयावधि में आपको फूँक-फूँक कर कदम रखने की आवश्यकता है. साथ ही मंगलकार्य-व्रत-उपवास-धार्मिक कृत्यों पर निर्भर रहकर ही आप अपना प्रत्येक बिगडा कार्य बना सकते हैं.
रेवती नक्षत्र:-आपका भाग्य लाभदायक,विद्या-बुद्धि के क्षेत्र में उन्नति कराने वाला,लाटरी/शेयर/प्रतियोगिता अथवा अचानक रूप से धन प्राप्त कराने वाला होगा. प्रत्येक कार्य में छल-बल और बडी चालाकी,चतुराई से सफलता प्राप्त करने में सफल हो जाएंगें. दाम्पत्य जीवन का सुख-सम्बन्ध सुन्दर और प्रेमपूर्ण रहेगा. सन्तान की ओर से चली आ रही कोई चिन्ता से मुक्ति प्राप्त होगी. पूर्व दिशा की यात्रा और पूरब मुँह बैठकर सभी कार्य करना आपके लिए ज्यादा कल्याणकारी रहेगा. राजनीति,वक्ता,लेखन,मीडिया,पत्रकारिता से जुडे जातकों को मीन राशि के इस बृहस्पति के उम्मीद से कहीं अधिक शुभफल देखने को मिलेंगें.निज अथवा परिवार की किसी स्थायी सम्पत्ति के क्रय-विक्रय का भी योग बन रहा है.