मुहूर्त विचार की अनिवार्यता.....

ज्योतिष शास्त्र का प्रमुख स्तम्भ है-----मुहूर्त विचार! मुहूर्त का आशय यह जानने से है कि कौन सा कार्य कब किया जाए, जिससे कि व्यक्ति को उस कार्य में निर्विघ्नता प्राप्त हो. उसे कार्य में सफलता प्राप्त हो सके. यदि गहराई से देखें, तो पायेंगें कि हमारे आसपास जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह सब एक अदृश्य शक्ति द्वारा नियन्त्रित है, यहाँ तक कि स्वयं काल(समय) भी. आकाशमंडल में ग्रहों के द्वारा उनके अपनी कक्षा में परिभ्रमण की गति के अनुसार हर क्षण नये-नये संयोग बनते रहते हैं. उनमें जहाँ कुछ अच्छे संयोग होते हैं, तो वहीं कुछ खराब भी होते हैं. अच्छे संयोगों की गणना कर के उनका उचित समय पर जीवन में इस्तेमाल करना ही शुभ मुहूर्त पर कार्य सम्पन्न होना होता है.
यहाँ हो सकता है कि आप में से ही कोई ये सवाल भी कर बैठे कि भला क्या मुहूर्त पर कार्य करने से भाग्य बदल जाता है ? अर्थात यदि भाग्य में कोई उपलब्धि न हो, तो अच्छे मुहूर्त पर कार्य कर के भी क्या हम वस्तु विशेष को प्राप्त कर सकते हैं ?
ये ठीक है कि मुहूर्त हमारे भाग्य को तो नहीं बदल सकता, लेकिन कार्य की सफलता के पथ को तो सुगम बना सकता है. जिस प्रकार, कि यदि हमें किसी कार्य से कहीं जाना हो और बाहर आंधी, तूफान या मूसलाधार बारिश पड रही हो, तो निश्चित है कि गंतव्य पर पहुँचना बहुत कठिन हो जाएगा और यदि मौसम अच्छा हो, तो वही यात्रा हमारे लिए सुगम और आनन्ददायक हो जाएगी. इसी प्रकार से शुभ मुहूर्त में किया गया कोई भी कार्य सुगम हो जाता है. साथ ही यदि किसी प्रकार की अन्य हानि का होना लिखा है, तो वह क्षीण या कम हो जाती है. कहने का तात्पर्य यही है कि भाग्य बदले या न बदले, परन्तु जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों को शुभ मुहूर्त में किया जाए तो भी व्यक्ति जीवन में किसी सीमा तक निर्विघ्नता एवं खुशहाली प्राप्त कर सकता है.
वैदिक ज्योतिष में जीवन के समस्त कार्यों के लिए अलग-अलग शुभ मुहूर्तों का विधान है. मुहूर्त काल गणना के अनुसार दिन एवं रात्रि में कुल 30 मुहूर्त होते हैं------15 दिन में और 15 रात्रि में. इस प्रकार एक मुहूर्त काल का समय होता है--48 मिनट और 24 सैकिंड. इसके अतिरिक्त तिथि, वार, नक्षत्र इत्यादि के आधार पर भी विभिन्न प्रकार के शुभाशुभ मुहूर्त निर्मित होते हैं-----जिन्हे योग कहा जाता है. उनका उल्लेख करने का यहाँ कोई औचित्य भी नहीं है, क्योंकि पाठकों की जानकारी हेतु यहाँ हम सिर्फ प्रतिदिन निर्मित होने वाले मुहूर्त के बारे में बात कर रहे हैं.
दिनरात के (रूद्र मुहूर्त से समुद्रम प्रयन्त) कुल 30 विभिन्न प्रकार के मुहूर्तों में एक मुहूर्त आता है----अभिजीत मुहूर्त जिसे कि "विजय मुहूर्त" भी कहा जाता है. यह दिन का अष्टम मुहूर्त होता है, जो कि अभिजीत नामक नक्षत्र के आधार पर निर्मित होता है. प्रतिदिन मध्याँह काल में लगभग 11:36 से 12:24 तक का समय इस मुहूर्त का रहता है. इस समय अवधि में नवीन व्यवसाय आरम्भ, गृह-प्रवेश अथवा नींव डालना, निर्माण करना आदि किसी भी नये कार्य का आरम्भ व्यक्ति के लिए शुभ फलदायी एवं किए गए कार्य में उसे निर्विघ्नता प्रदान करता है.
बेशक कुछ लोग इन सब पर भले ही विश्वास न करें लेकिन ये बात अनुभवसिद्ध है कि व्यक्ति की सफलता, असफलता और जीवन स्तर में परिवर्तन के संदर्भ में मुहूर्त की महत्ता को किसी भी तरह से अलग नहीं किया जा सकता.