आपका जन्मनक्षत्र और ग्रहों के गोचर भ्रमण का प्रभाव

ज्योतिष विद्या में तात्कालीन ग्रहस्थिति जन्मकुंडली (Birth-Chart) ही सम्बद्ध प्राणी के (जीवन को आँकते हुए) भावी फलादेश का आधार बनती है. जन्म लग्न को आदि बिन्दु (प्राण) मानकर, उसी न्यायपथ से तत्कालीन जन्म नक्षत्र एवं जन्म राशि ही भविष्य की झलक का एकमात्र आधार होती है, क्योंकि चन्द्रमा जहाँ काल-पुरूष के मूर्ति (मन और शरीर) का प्रतीक है,वहीं नक्षत्र---ज्योतिष शास्त्र की आत्मा या कहें कि नींव है, जिसपर ज्योतिष प्रवर्तकों, ऋषियों-मुनियों नें वैदिक भारतीय ज्योतिष का सुरम्य प्रासाद खडा किया है.
नक्षत्र---अर्थात राशि चक्र(मेष से मीन प्रयन्त) का सत्ताईसवाँ भाग. जन्म के समय चन्द्रमा राशिचक्र के जिस भाग पर संचार कर रहा होता हैं--वह उस व्यक्ति का जन्म नक्षत्र कहलाता है.जिस नक्षत्र में व्यक्ति का जन्म होता है---उसी अनुरूप उसका आचार-विचार,उसकी समझ-बूझ,उसका व्यक्तित्व होता है. इसलिए गोचर में ग्रहों के परिभ्रमण से प्राप्त होने वाले शुभाशुभ फलों की जानकारी हेतु व्यक्ति को अपनी चन्द्र राशि-नक्षत्र का ज्ञान अत्यन्त ही आवश्यक विषय है. जन्मकालीन नक्षत्र का ज्ञान प्रत्येक जन्मकुण्डली में लिखे हुए राशि-नामाक्षरों के आधार पर हो जाता है,बशर्ते की जन्मकुंडली (हस्तनिर्मित) की रचना किसी योग्य गणितज्ञ द्वारा हुई हो.

यदि आपकी जन्मकुंडली है तो आप किसी भी ज्योतिषी को दिखलाकर यह जानकारी प्राप्त कर लें कि आपका जन्मनक्षत्र तथा जन्मराशि कौन-सी है. उन्ही के अनुसार आप गोचर में ग्रहों के भ्रमण का सही एवं सटीक फलादेश प्राप्त कर सकते है----वही आपके जीवन में पूर्ण रूप से चरितार्थ होगा.

यदि जन्मकुंडली, जन्मनक्षत्र और जन्मराशि का भी अभाव हो, किन्तु आपके पास अपना जन्मविवरण उपलब्ध है तो आप पोस्ट के नीचे जुडे कमेन्ट बाक्स अथवा ई-मेल के माध्यम से अपना जन्मविवरण भेज कर अपनी जन्मराशि एवं जन्मनक्षत्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. ताकि आगामी लेख को पढकर आप गोचर में "बृहस्पति" ग्रह के मीन राशि में आगमन (6 दिसम्बर से) पश्चात आपको प्राप्त होने वाले शुभाशुभ प्रभाव को जान सकें.

आगामी पोस्ट:-- बृहस्पति के मीन राशि में गोचर भ्रमण का आप पर पडने वाला शुभाशुभ प्रभाव