गन्डमूल नक्षत्र तथा उनका जीवन पर पडने वाला प्रभाव---( मूल नक्षत्र )

मूल नक्षत्र:- यह नक्षत्र 11 तारों का एक समूह है, जिसकी आकृति सिँह की पूँछ के समान है.इस नक्षत्र का विस्तार 0-0 अंश से धनु राशि के 13-20 अंश तक है. इस मूल नक्षत्रोत्पत्ति का एकमात्र कारण ये है कि प्रकृति द्वारा जातक को अपने पूर्वजन्म के कार्मिक बन्धनों से छुटकारा दिलाने का एक अवसर प्रदान किया गया है. इसे आप एक प्रकार से दैव-कृपा ही कह सकते हैं. ओर दैव-कृपा की रूचि अपने पात्र को ऎन्द्रिय एवं भौतिक सुख प्रदान करने की नहीं होती. वह उन्हे सिर्फ आत्म-ज्ञान की ओर अग्रसर करना चाहती है.फलस्वरूप ऎसी स्थिति में निश्चित रूप में व्यक्ति का जीवन आवश्यक रूप से सरल, शान्त एवं निष्कंटक नहीं रह सकता, क्यों कि दैव उसे सुख और ऎश्वर्य जगत की क्षणभंगुरता दिखलाने का अवसर प्रदान करता ही रहता है.जिसकी वजह से जीवन की बाह्य और आन्तरिक प्रवृतियों का एकीकरण कर पाना जातक के लिए बेहद कठिनतम कार्य सिद्ध होता है. ऎसे जातक के लिए व्यक्तिगत आनन्द नहीं वरन् पारिवारिक तथा सामाजिक आभारों का भार वहन करना ही एक तरह से इनके भाग्य में होता है.  

1. इस नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने पर जातक इतिहास, पुराण, धार्मिक ग्रन्थ तथा श्रेष्ठतम कला-कृतियों में विशेष रूचि रखने वाला होता है. व्यक्ति अपने सामाजिक व्यवहार में न्यायसंगत होते हुए धार्मिक नियमों का प्रतिपालन परमात्मा के भय से नहीं अपितु आत्मा की आवाज से करते हैं.इस चरण में जन्म होने का अर्थ ये है कि जातक अपने पिता के लिए सचेतक रूप में उत्पन हुआ है......

2. इसका जातक संगठन शक्ति को चलाने वाला और बडा चालाक, चतुर और अपने कार्य का माहिर व्यक्ति होता है.साथ ही इन लोगों में अपनी वेशभूषा के प्रति अतिरिक्त सावधानी देखी जाती है. वार्तालाप में मधुरता इनका एक अतिरिक्त गुण रहता है. ये लोग दरअसल भौतिकता के ज्ञान से भरे रहते हैं. ये नैतिकता, आदर्शवादिता, आध्यात्मिकता तथा धार्मिक विषयों पर बहुत ठीक और निपुणता से व्याख्यान दे सकते हैं, परन्तु इनमें स्वयं इस कठिन मार्ग पर चलने का साहस बिल्कुल नहीं होता. साहस से भी अधिक इनमें संकल्प शक्ति का अभाव होता है. बहुधा इनका जीवन प्राय: प्रवास में ही व्यतीत होता है. द्वितीय चरण का जातक अपनी माता के लिए सचेतक रूप में जन्म लेता है......

3. मूल नक्षत्र का ये तृतीय चरण व्यक्ति को निवृति मार्ग की ओर उत्प्रेरित करता है. हालाँकि यह जातक की प्रकृति को परिलक्षित करता है, न कि उसके कार्य की दिशा को. इसलिए अपनी परिस्थितियों से निराशा एवं दैवी-असंतोष के कारणवश इस नक्षत्र चरण में जन्म लेने वाला जातक ताउम्र असंतुष्ट रहता है. काल्पनिक आदर्शों से उत्प्रेरित होकर ये लोग पूर्णता को प्राप्त करने में जुटे रहते हैं, लेकिन जब लक्ष्य असाध्य प्रतीत होने लगता है तो उस आदर्श से मुँह मोडकर छिद्रान्वेषण करने में भी देर नहीं लगाते.  यह चरण व्यक्ति के भावनात्मक जीवन में सुख और पारिवारिकन सौहार्द की कमी को दर्शाता है.

4. नक्षत्र के इस चरण में जन्म लेने वाले जातक बौद्धिक व्यक्ति होते हैं, जो अपनी ही एक अलग विशेषता रखते हैं. वो विशेषता ये है कि बाह्यमुखी होने के चलते ये लोग प्रकृति के गुप्त नियमों को प्रकाशित कर पाने तथा किसी व्यक्ति विशेष की आन्तरिक शक्तियों को उभारने की जबरदस्त क्षमता रखते हैं. परन्तु जीवन में सम्भावनाओं से लाभ उठा पाने से ये लोग पीछे रह जाते हैं.

क्रमश:.....