24 सितंबर यानि फैसले की घडी----क्या कहते हैं सितारे ?

24 सितंबर 2010----यानि वो दिन, जिस पर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक को लेकर आने वाले फैसले के मद्देनजर पूरे देश की निगाहें इस समय टिकी हुई है और फैसले की घडी ज्यों ज्यों नजदीक आ रही है, त्यों-त्यों इस पर चर्चाओं का बाजार भी पूरी तरह से गर्माता जा रहा है. हर आदमी अपनी ओर से ये कयास लगाने में जुटा है कि फैसले के बाद क्या होगा ? देखा जाए तो मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर व्यक्ति भीतर से आशंकित हैं.
ज्योतिषीय दृ्ष्टि से देखने पर भी ये बात स्पष्ट रूप से उजागर हो रही है कि इस विवाद से जुड़ा कोई भी फैसला भविष्य के लिए एक नया युद्ध क्षेत्र तैयार करने वाला है. हालाँकि फैसले के दिन यानि 24 सितंबर को ग्रह स्थिति पूर्णत: सामान्य है, जिस कारण यदि उस दिन निर्णय आ जाता है तो दोनों में से किसी भी पक्ष की ओर से त्वरित रूप में कैसी भी भीषण प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिलेगी. हाँ, किन्ही छिटपुट विरोध प्रदर्शनों को एक सामान्य प्रतिक्रिया के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
यूँ भी ये देश इस प्रकार के विरोध प्रदर्शनों का तो अब आदि हो चला है. कहने का अर्थ ये है कि 24 तारीख तथा उसके बाद आने वाले दो दिनों तक माहौल एक तरह से सामान्य रूप में ही दिखाई देगा तथा 27 सितंबर तक ये तीन दिन का समय अनुकूल हैं, जिनमें दोनो पक्षों की ओर से किसी समझौते/सहमति की ओर कदम बढाए जाने के सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद दिखाई देती है.....लेकिन आगे की ग्रहस्थिति देखकर मैं थोडा आशंकित हूं .क्यों कि आने वाले 27 सितंबर को जहाँ एक ओर सूर्य के हस्त नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही, शनि और सूर्य----इन दोनों विपरीत प्रकृ्ति के ग्रहों का एकराशि एवं एकनक्षत्र सम्बन्ध बन रहा है. वहीं इसी दिन राहू मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण और केतु आद्रा के द्वितीय चरण में प्रवेश करने जा रहे हैं. इसके साथ ही केतु ग्रह पर शनि की पूर्ण दशम दृ्ष्टि भी रहेगी........
यह ग्रह योग इस प्रकार के निर्मित हो रहे हैं कि यूँ लगता है, मानो कालचक्र आने वाले किसी अनिष्ट की तैयारियों में जुटा है. सूर्य-शनि का ये एकनक्षत्रीय योग जहाँ जनता में प्रशासन एवं न्याय व्यवस्था के विरूद्ध रोष की भावना को बलवती कर सकता है, वहीं देश में किन्ही जगहों विशेषत: उत्तर-पश्चिमी भूभाग में अराजकता, हिँसा एवं आँतकवाद की भीषणता को भी मुखर कर सकता है. परिणामस्वरूप आने वाले कुछ दिनों में उपरोक्त ग्रहस्थिति भयानक विस्फोट, अग्निकाँड एवं रक्तपात तथा बाढ, भूकम्पजन्य प्राकृ्तिक प्रकोप की तरफ इशारा करती प्रतीत होती है......जिसका प्रभाव आगामी माह की 16 तारीख तक रहेगा.
ग्रह स्थिति को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि 27 सितंबर से 16 अक्तूबर तक का समय हालात की भीषणता की ओर स्पष्ट रूप से इंगित कर रहा है.......