सुखी दाम्पत्य जीवन का आधार---सप्तपदी

विवाह के समय लिए जाने वाले सात वचन सात जन्मों तक साथ रहने का प्रतीक माने जाते हैं, किन्तु आज इन वचनों से भला कितने लोग ठीक से परिचित हैं.....
विवाह समय फेर इत्यादि समस्त आवश्यक कार्य हो जाने पर भी जब तक कन्या वर के वाम भाग में नहीं आती, तब तक विवाह कार्य सम्पन्न नहीं होता तथा कन्या भी तब तक कुमारी ही कहलाती है. यहाँ पर कन्या वर से सात वचन माँगती है, जिनसे उसके भावी जीवन की सुरक्षा, मान-सम्मान, गरिमा-गौरव तथा अस्मिता की रक्षा हो सके. पति द्वारा इन वचनों को स्वीकारने के पश्चात वह निश्चिंत होकर भावी जीवन का प्रारम्भ करती है. इस प्रकार से जो ये सात वचन माँगे जाते हैं, वे सप्तपदी के रूप में प्रचलित हैं. प्राचीनकाल से इन वचनों का हिन्दू समाज में बहुत अधिक प्रभाव रहा है. यह सात वचन वर-वधू को सुखी दाम्पत्य जीवन की ओर प्रेरित करते हैं.
कन्या का विवाह करते समय किसी भी माता-पिता के मन में यह आशंका तो रहती है कि विवाह पश्चात उनकी पुत्री का जीवन कैसा व्यतीत होगा? ससुराल में उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा? माता-पिता की इसी आशंका को दूर करने के लिए ही युगों पूर्व ऋषि-मुनियों द्वारा ऎसी व्यवस्था की गई, जिससे विवाह पश्चात कन्या को किसी कष्ट का सामना न करना पडे. इसके लिए कन्या पति के वामांग में आने से पूर्व उससे ये सात वचन मांगती है---यही सातों वचन दाम्पत्य सम्बन्धों को सुदृ्ड आधार प्रदान करते हैं. कभी जिस समय यह व्यवस्था बनाई गई होगी, उस युग में पुरूष दिए गए वचनों को पूरी तरह से निभाने को संकल्पशील होता होगा. कहा भी तो गया है कि "प्राण जाई पर वचन न जाई". विवाहोपरान्त पत्त्नि की समस्त आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ साथ उसकी अस्मिता तथा गरिमा की रक्षा का दायित्व भी पति का ही होता था, इसलिए यह वचन भी पति से ही लिए जाते ताकि वह पत्नि का पूर्ण रूप से ध्यान रख सके. पति भी जी जान से अपने वचनों को निभाता था. इस कारण तब दाम्पत्य सम्बंधों में भी मधुरता, प्रेम, अनुराग, समर्पण आदि देखने को मिलता था. लेकिन आज के जमाने में भला किसी शपथ, संकल्प या वचन की कीमत ही क्या रह गई है. जहाँ लोग जुबान देकर मुकरने में एक पल भी नहीं लगाते तो वहा जीवनभर इन वचनों पर खरा उतर पाने की उम्मीद भी कहाँ की जा सकती है......बहरहाल दूसरी ओर, आज शादी-विवाह के अवसर पर जल्दबाजी भी इतनी मची होती है कि विवाह सम्पन्न कराने वाले पंडित जी क्या कह रहे हैं, इसकी तरह किसी का ध्यान भी नहीं जाता. वे न तो इन सात वचनों के भाव को समझ पाते हैं और न ही इनका महत्व जान पाते हैं.
वर्तमान में दाम्पत्य सम्बंधों के कमजोर होने तथा टूटने-बिखरने का सम्वतय: यह भी एक बडा कारण हो सकता है. इन वचनों के महत्व को देखते हुए लेख के आगामी भाग में सातों वचनों के बारे में विस्तार से जानकारी देने का प्रयास रहेगा.........
क्रमश:.......