मीनस्थ बृ्हस्पति(गुरू) का आपकी राशि पर पडने वाला शुभाशुभ प्रभाव

पूर्व आलेख में आपने वैदिक ज्योतिष और बृ्हस्पति ग्रह के विषय में पढा और जाना कि दिनाँक 2 मई को गुरू यानि बृ्हस्पति ग्रह का मीन राशि में आगमन हो चुका है. नवम्बर 2010 तक इनका इस राशि में ही संचार रहेगा किन्तु 23 जुलाई 2010 से गति परिवर्तन अर्थात मार्गी गति (सीधा चलना) से वक्रगति (पीछे को चलना) होने के फलस्वरूप 1 नवम्बर 2010 को पुन: अपनी पिछली राशि कुम्भ में प्रवेश कर जाएंगें. तत्पश्चात 6 दिसम्बर 2010 को दोबारा से इनका मीन राशि में प्रवेश होगा. इस वर्ष 23 जुलाई से 18 नवम्बर 2010 तक ये वक्री और 1 नवम्बर से 6 दिसम्बर तक कुम्भ राशि में रहेंगें. बृ्हस्पति जिन्हे कि ज्ञान, भक्ति, सात्विकता,धर्म/अधर्म,नीति/अनीति की भेद प्रदायक शक्ति एवं पारलौकिक विषयक ज्ञान इत्यादि कारकत्व प्राप्त हैं,एक सात्विक एवं ब्राह्मत्वगुण सम्पन्न राशि (मीन) में संचार होने के फलस्वरूप यूँ तो भचक्र की समस्त 12 राशियों हेतु ही कल्याणकारी रहेंगें किन्तु इनका सर्वाधिक सुखद प्रभाव कर्क तथा वृ्श्चिक राशि के जातकों को देखने को मिलेगा.
आईये जानिए कि आपकी राशि पर ये मीनस्थ बृ्हस्पति अपना क्या प्रभाव दिखाने वाले हैं:-------

मेष, सिँह,धनु राशियाँ:-आमतौर पर इन राशियों के जातकों को रोग-व्याधी से कष्ट का भय कम ही रहता है, किन्तु यदि कभी किसी रोग का सामना करना पड ही जाए तो फिर उन्हे कष्ट भी सामान्य से अधिक समय तक ही झेलना पडता है. मीनस्थ बृ्हस्पति की समयावधि में इन लोगों को किसी ऎसी ही शारीरिक कष्टदायक व्याधि का सामना करना पडेगा. मन में किन्चित भय, चिंता तथा उद्वेग का आधिक्य किन्तु आत्मविश्वास में कमी रहेगी. पूर्व में चली आ रही किसी समस्या को लेकर, बुद्धि एवं मन के आपसी द्वन्द के चलते किसी अन्तिम निर्णय तक पहुँच पाना ही आपके लिए सबसे बडी चुनौती सिद्ध होने वाली है किन्तु पारिवारिक परामर्श/सहयोग के कारण अन्तत: आप उस समस्या का निदान खोज पाने में सक्षम हो ही जाएंगें.अपने सिद्धान्तों पर भाग्य को तौलने की बजाय,केवल सही मार्ग को अपनाकर कार्य करते रहेंगें तो ही उस समस्या को लाँघकर सफलता का मुख देख पाएंगे. आपको मीनस्थ बृ्हस्पति का सर्वाधिक सुखद फल यही प्राप्त होने वाला है कि आपका मन भोग से योग(विद्या/ज्ञान प्राप्ति) की ओर मुडने लगेगा.

वृ्षभ,कन्या,मकर राशियाँ:- आपके लिए मीनस्थ बृ्हस्पति की संचरण अवधि यात्रा-भ्रमण में सफलता प्रदायक तथा न्यायपूर्ण कार्यो की ओर प्रेरित करने वाली रहेगी। सन्तान, सगे-सम्बन्धियों तथा जीवन साथी की ओर से सुख की प्राप्ति होगी. धार्मिक कार्यो की ओर रूझान बढने लगेगा.निकट भविष्य में आने वाली किसी भी शुभाशुभ धटनाओं का सहज अन्दाजा लगा लेना,मौके पर सतर्क हो जाना आपके लिए बेहद आसान कार्य सिद्ध होने वाला है. मन में सोचे गए बहुत से महत्वपूर्ण कार्य अनायास अपने आप ही सिद्ध होने लगेंगें. 14 से 21, 27 से 34 तथा 42 से 51 वर्ष आयुमध्य के व्यक्ति उपरोक्त फल कुछ अधिक तीव्रता से अनुभव करेंगें. सुख के समय सारी बातें भूल जाना और दुख/कष्ट के समय किंकर्तव्यविमूढ बनकर पुरानी रामकहानी ले बैठने के दोष से मुक्त होना आप लोगों के लिए बहुत आवश्यक है.

मिथुन,तुला,कुम्भ राशियाँ:-अनायास भ्रमण में समय व्यतीत,सत्य भाषण में कमी,वाणी में कडकता और तीखापन,कर्मक्षेत्र में पूर्णरूप से अपने उतरदायित्वों के निर्वहण हेतु किन्चित कमजोरी अनुभव करने इत्यादि कुछेक अहितकारी फलों के बावजूद धार्मिक भावनाय़ें प्रबल,भावुकता की अधिकता,उच्चकोटी की किसी कला के प्रति रूझान, अध्ययन-अनुसंधान और स्वाध्याय के प्रति ललक जैसे विशेष शुभफलों की भी प्राप्ति होंगी. मन्त्रोपासना एवं तान्त्रिक क्रियाकलापों में रूचि गोपनीय होगी. धन संचय की कला जानते हुए भी आवश्यक व्यय की सीमा रेखा का उल्लंघन होता ही रहेगा. मन के विचार और भावनाओं को छिपाकर कुछ दूसरे ही ढंग से प्रदर्शित करने लगेंगें. बृ्हस्पति की वक्रावधि( 23 जुलाई से 18 नवम्बर 2010 तक) मध्य मन अनायास विपरीत लिंगी आकर्षण में बँधने लगेगा. 16 से 19, 31 से 38, 43 से 46 तथा 68 से 77 आयु वर्ग के जातकों को उपरोक्त फलों की प्राप्ति अधिक तीव्रता से होगी.

कर्क,वृ्श्चिक, मीन राशियाँ:- आमतौर पर प्रारब्ध और प्रयत्नों के परस्पर घनिष्ठ सम्बंधों से पूर्णतया परिचित रहना इन राशियों के जातकों की विशेषता मानी जाती है. किन्तु इस समयावधि में आप जो कुछ भी प्राप्त करेंगें वो आपके स्वप्रयत्नों से बहुत बढ कर होगा अर्थात पुरूषार्थ की अपेक्षा आपको भाग्य के फल अधिक प्राप्त होंगें. समाज,परिवार एवं अपने कार्यक्षेत्र में भरपूर सम्मान मिलेगा. प्रवास और परिभ्रमण के शौकीन न होने पर भी विवश्तावश बारम्बार यात्राएं करनी पडेंगी.अपके बहुत से कार्य वृ्द्ध व्यक्ति एवं स्त्रियों के माध्यम से ही सफल होंगें. किसी सार्वजनिक आन्दोलन/मंच में सहभागिता,किसी लघु समुदाय का नेतृ्त्व करना, सलाहकार होना इत्यादि रूप में एक नवीन जिम्मेवारी को वहन करेंगें. 23 जुलाई से 18 नवम्बर के मध्य बगल अथवा पैर में किसी चोट,रोग इत्यादि से पीडा अवश्य भोगनी पडेगा. 19,28,30, 24 से 28, 33 से 37, 47 से 54 तथा 66 से 79 आयु वर्ग के जातकों को उपरोक्त फल अधिक तीव्रता से प्राप्त होंगें.