वैदिक ज्योतिष और बृ्हस्पति ग्रह

गुरू यानि बृ्हस्पति ग्रह जो कि हमारे इस सौरमंडल के सभी ग्रहों में सबसे बडा ग्रह है। यही कारण है कि श्रेष्ठ व विद्वान इस अर्थ में हमेशा "गुरू" शब्द का प्रयोग किया जाता है। "गुरू" जो कि दो शब्दों के मेल से बना है----"गु" और "रू"। "गु" का अर्थ है अंधेरा या अज्ञान ओर "रू" यानि प्रकाश या ज्ञान। अर्थात "गुरू" वो हुआ जो कि हमारे अज्ञान को मिटाकर हम कौन हैं ?, कहां से आए हैं ? जन्म लेने का हमारा उदेश्य क्या है ? हमारे कर्तव्य कर्म क्या हैं ? मृ्त्यु पश्चात इस आत्म तत्व को कहाँ जाना है ? धर्म/अधर्म,नीति/अनीति का भेद इत्यादि प्रश्नों पर प्रकाश डालता है। पाश्चात्य ज्योतिष में गुरू को Devine Mother या Devine Moon कहा जाता है। आजकल अधिकाँश ज्योतिषी इस ग्रह को धन सम्पदा,वैभव,सांसारिक सुख देने वाला ग्रह मानते हैं। लेकिन जैसा कि मैं अपने पूर्वलिखित आलेखों में भी कईं बार इस बात को दोहरा चुका हूँ कि इस ग्रह का नैसर्गिक स्वभाव सिर्फ इन्सान को पारलोकिक विषयक ज्ञान देना है न कि भौतिक सुख, सम्पदा इत्यादि। कर्मकांडी ब्राह्मण, उपदेशक, शिक्षक तथा आध्यापक इसी ग्रह के प्रभाव में आते हैं। बाहर से रूक्ष किन्तु भीतर से कोमल,बाहरी रहन-सहन मामूली लेकिन कुशाग्र बुद्धि, जितना विषयी उतना ही विरागी---इस प्रकार के परस्पर विरोधी स्वभाव गुण इस ग्रह में पाए जाते हैं।
इस ग्रह का एकमात्र कार्य मनुष्य को वास्तविक शिक्षा प्रदान करना है। जिससे कि मनुष्य अपने प्रयत्नों द्वारा अपनी अन्तर्निहित शक्तियों का भली भांती विकास कर सके। यह व्यक्ति को ज्ञान प्राप्ति के स्वप्रयत्नों में सहयोग तथा सहायता देता है, उसके लिए अनुकूल परिस्थियों का निर्माण करता है और उसे स्वयं के अनुभवों द्वारा ज्ञान(सीखना) प्राप्त करने देता है। जिससे कि आगे चलकर उसका जीवन प्रतिक्षण प्रतिवर्तित तथा परिवर्द्धित होता चला जाए। स्पष्ट है कि इस प्रकार भविष्य में उसका यह विकास ऊध्र्वोन्मुख,उन्नयनकारी तथा उचित दिशा में होता है।
चलिए अब बात करते हैं, इस ग्रह के राशी परिवर्तन की........ज्योतिष विद्या में इस ग्रह का सर्वप्रमुख स्थान होने के कारण ही इसके राशि परिवर्तन को भी अधिकांश व्यक्ति एक उम्मीद भरी दृ्ष्टि से देखते हैं। ऎसी ही जिज्ञासा एवं उम्मीद से भरी एक दृ्ष्टि हमारे इस ब्लाग के एक सम्मानीय पाठक भी लगाए बैठे हैं। पूर्व सप्ताह दिनाँक 2 मई 2010 को बृ्हस्पति के मीन राशि में आगमन से उसका वैश्विक एवं विभिन्न राशियों पर पडने वाले प्रभाव के विषय में जानने की उन्होने उत्सुकता व्यक्त की है। सो, आगामी पोस्ट उसी विषय पर आधारित रहेगी.....उपरोक्त बृ्हस्पति ग्रह विषयक जानकारी सिर्फ इसीलिए प्रदान की गई है ताकि आगामी पोस्ट में उसके प्रभावों को समझने,ग्रहण करने में आपको सुविधा रहे......