आप स्वयं जान सकते हैं कि आपका आज का दिन कैसा व्यतीत होगा...........

क्सर जीवन में कुछ चीजें ऎसी देखने को मिल ही जाती हैं जो कि प्रथम दृ्ष्टया तो कुछ तर्कसंगत प्रतीत नहीं होती लेकिन यदि उन्हे प्रायोगिक तौर पर परखने का अवसर मिले तो उनमें कहीं न कहीं कुछ ऎसी सच्चाई, कुछ ऎसी सुसंगति दिखाई पड जाती है कि इन्सान स्वयं को हतप्रभ सा अनुभव करने लगता है। आज आप लोगों के सामने भी एक ऎसी ही विधि रखने जा रहा हूँ, जिसे पढकर शायद आपकी पहली प्रतिक्रिया यही होगी कि क्या बकवास लिखा है! ऎसा कुछ नहीं हो सकता। लेकिन जो इस ब्लाग के नियमित पाठक हैं वो इस तथ्य और मेरे उदेश्य दोनों से भली भान्ती परिचित हैं कि यहाँ किसी भी लेख में आपको न तो कल्पना का समावेश मिलेगा और न ही शब्दों के जरिए निराधार,असत्य,अन्धविश्वास या पाखंड को ढंकने का अनर्थक प्रयास। अपितु हमारा तो एकमात्र यही उदेश्य रहा है कि सत्य को उसके मूल रूप में सामने लाया जाए फिर चाहे वो सत्य कितना भी कडुवा या वीभस्त क्यों न हो।
अत: जो पाठक जल्दी में, बिना आजमाए केवल पढ कर ही इस पोस्ट के विषय में अपना निर्णय देना चाहेंगें, उनका अनुमान बहुत हद तक भ्रमपूर्ण हो सकता है। आशा है जिज्ञासु तत्वांवेषी पाठक इस पोस्ट को भी उसी भाव से स्वीकारेंगें, जैसा कि वो हमारे पूर्व के लेखों को स्वीकार करते रहे हैं। हाँ इतना अवश्य कहना चाहूँगा कि निर्णय देने के अधिकारी आप तभी हो सकते हैं, जब कि आप स्वयं परीक्षा करके सही गलत रूपी किसी अन्तिम निष्कर्ष तक पहुँच चुके हों।
खैर...हम आपको एक ऎसी विधि के बारे में बताना चाह रहे थे कि जिसके जरिए आप स्वयं प्रतिदिन अपने दिन के फल के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि आपका आज का दिन कैसा व्यतीत होगा। वो भी बिना किसी ग्रह, राशी अथवा ज्योतिष की जानकारी के।जिसमें कि आपको शत-प्रतिशत सच्चाई मिलेगी। आप एकबार स्वयं आजमा कर देखिए और फिर उसके बाद निसंकोच होकर बताईयेगा कि आपका क्या अनुभव रहा।
विधि यह है कि आप प्रतिदिन प्रात:काल स्नान इत्यादि के पश्चात बासी मुँह किसी कागज पर 108 के अन्दर कोई भी एक संख्या मन में सोच कर लिख लीजिए। फिर उसमें 35 जोड दीजिए और जिस दिन-वार की संख्या को उसमें से घटा दीजिए, फिर 21 से भाग दे दीजिए-----जो शेष बचे उसका फल यहाँ पर देख लीजिए।
दिन-वार की संख्या इस प्रकार है----रविवार 5, सोमवार 1, मंगलवार 3, बुधवार 4, बृ्हस्पतिवार 11, शुक्रवार 7 और शनिवार 13।
उदाहरणस्वरूप जैसे कि आज बृ्हस्पतिवार का दिन है ओर मैंने प्रश्न करने का विचार करके मन में सोचकर कागज पर 96 की संख्या लिख दी, अब उसमें 35 जोडे तो योगफल 131(96+35) हो गया। फिर इसमें से बृ्हस्पतिवार के दिन की संख्या 11 घटाकर 21 से भाग दिया तो शेष बचा 15। अब आगे 15 नम्बर की संख्या का फल देखा तो यह मिला---"परेशानी और खर्च ज्यादा होगा" । इसी प्रकार आप प्रतिदिन का देखें किन्तु ध्यान रहे कि एक व्यक्ति सिर्फ एक ही बार देखे। ऎसा न हो कि पहली बार में आपको कुछ अशुभ फल मिले तो आप दूसरी बार फिर से ट्राई करने की सोचने लगें कि शायद अब अच्छा फल मिल जाए।
संख्या का फल:-
1. किसी अच्छे सज्जन व्यक्ति का दर्शन पाकर लाभ होगा।
2. मन में भान्ती भान्ती के विचार उठेंगें, कार्य पूर्ण होगा।
3. दिन अच्छा व्यतीत होगा।
4. आज का दिन चिन्ता व्यथा में ही गुजरेगा।
5. अन्य दिनों की अपेक्षा आज दौड धूप अधिक करनी पडेगी, लाभ होगा।
6. सुख और प्रसन्नता के साथ दिन बीतेगा।
7. कोई गुप्त चिन्ता सताएगी, नुक्सान होगा।
8. आज दिन भर आप चिन्तित रहेंगें, रात को नींद भी नहीं आएगी।
9. आज खर्च अधिक करना पडेगा, लाभ कम रहेगा।
10.चिन्ता, व्यथा और परिवार के लोग परेशान करेंगें।
11. जिस काम को सोचोगे, पूरा होगा।
12. काम सफल होगा, मन में आशा का संचार होगा।
13. झगडा-झंझट और चिन्तायुक्त दिन व्यतीत होगा।
14. इज्जत-मान और धन का लाभ होगा।
15.मानसिक परेशानी और खर्च अधिक होगा।
16.बढिया व्यतीत होगा।
17. बेहद खराब गुजरेगा।
18. सुख-शान्ती से व्यतीत होगा।
19.चिन्तित रहना पडेगा।
20.सारा दिन शुभ और लाभयुक्त बीतेगा।
21.अथवा 0 शेष रहने पर पैसे की चिन्ता सताएगी।
पुन: एक बार फिर से कहना चाहूँगा कि हालांकि इस विधि का मूल वैदिक ज्योतिष विद्या से कोई सम्बंध सरोकार नहीं है। बहुत साल पहले ये विधि हमें एक प्राचीन ग्रन्थ की भाषा टीका में पढने को मिली थी। अमूमन मैं ऎसी किसी भी चीज को निरी बकवास की श्रेणी में रखने वाला इन्सान हूँ। लेकिन न जाने मन की किस भावना के कारण एकबार इसे आजमा बैठा तो परिणाम एकदम सत्य निकला। सोचा कि शायद संयोग हो, उसके बाद फिर से दुबारा, तिबारा यानि कि सैंकडों बार आजमाने के बाद भी परिणाम हमेशा शत प्रतिशत खरा ही निकला। हालांकि इस पोस्ट को लिखने में मुझे अत्यधिक संकोच का अनुभव हो रहा है और इसके पीछे के कारण को भी मैं जानता हूँ ,लेकिन जो सामने है तो फिर उसे तो झुठलाया भी नहीं जा सकता। इसलिए कहता हूँ कि आप स्वयं आजमा कर देखिए और फिर बिना किसी संकोच के अवश्य बताईयेगा कि परिणाम क्या निकला..........