रत्न (gemstones) जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों को अनुकूलता में बदल सकता है !!!

हमारे प्राचीन महर्षियों नें अपने दीर्धकालीन अनुभवों के पश्चात यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया है कि प्रत्येक रत्न एक ग्रह विशेष की किरणें ग्रहण करके धारक व्यक्ति के शरीर में पहुँचाने का कार्य करता है। इसी अनुभव के आधार पर उन्होने यह निश्चय किया कि किस ग्रह की कितनी रश्मि शक्ति किसी मनुष्य के लिए पोषक होती है और दूसरे किस ग्रह की रश्मियों का कैसा समंजन उसके लिए कल्याणकर रहेगा। इसी विवेचना को आधार बनाकर उन्होने विभिन्न ग्रहों के लिए विभिन्न रत्न धारण करने का परामर्श दिया। किसी व्यक्ति की जन्मपत्रिका में विभिन्न भावाधिपति ग्रहो की सबलता, क्षीणता के आधार पर व्यक्ति का जीवन सुखमय और निरापद बनाने के लिए उन्होने रत्न रश्मियों को विशेष अनुपात में ग्रहण करने के नियम बनाये। नवग्रहों के नवरत्न और उनकी शक्ति के प्रभाव का विस्तृ्त विवेचन करके उन्होने जो मान्यताएं स्थापित की थी-------आज ज्ञानशून्य ज्योतिषियों के कारण वो समस्त मान्यताएं पूर्णत: लुप्त हो चुकी हैं। इसका एकमात्र कारण है----ज्ञान के क्षेत्र में पैर पसार चुकी नितांत व्यवसायिकता। कहने का तात्पर्य ये है कि जब हमारा उदेश्य ज्ञान के माध्यम से सिर्फ धन कमाना ही रह जाता है तो ज्यों ज्यों धन बढने लगता है, त्यों त्यों ही ज्ञान कहीं पीछे छूटता चला जाता है। जेब जरूर पैसों से भर जाती है लेकिन बुद्धि ज्ञान से खोखली हो चुकी होती है। इस विद्या के साथ भी आज यही हो रहा है। इसका प्रमाण आप कुछ दिनों पहले सूर्य ग्रहण के अवसर पर विभिन्न समाचार चैनलों पर नामी गिरामी स्वयंभू ज्योतिषाचार्यों और तर्कशास्त्री के बीच एक कार्यक्रम में देख भी चुके हैं। दरअसल हो ये रहा है कि आज लोगों के पास सिर्फ किताबी ज्ञान रह गया है, सब नें दो और दो चार के रट्टे लगाए हुए हैं--- वो सिर्फ बाहरी ज्ञान है, जो उनके लिए धन कमाने का साधन बना हुआ है----जब कि आन्तरिक ज्ञान से एकदम शून्य। और ये तो है ही ऎसी विद्या, जिसके लिए आपके पास आन्तरिक ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। यदि आप इस अन्दर के ज्ञान से वंचित हैं तो कहने को आप बेशक अपने नाम के साथ ज्योतिषाचार्य, ज्योतिषमर्मज्ञ या ज्योतिषशिरोमणि जैसे बडे बडे विशेषण प्रयोग करते रहें लेकिन सही मायनों में आप ज्योतिषी कहलाने के भी वास्तविक अधिकारी नहीं हैं। खैर.....हम बात कर रहे थे, रत्नों की उपयोगिता के बारे में। ये एक ऎसा विषय है जिसे एक पोस्ट मे निपटाना इस विषय के साथ अन्याय करना ही होगा। रत्नों का महत्व, उनकी उपयोगिता, उन्हे किन परिस्थितियों में धारण करना चाहिए, रत्न जन्मपत्रिका में किसी ग्रह की शुभ स्थिति होने पर धारण करना चाहिए या अशुभ स्थिति में, रत्न धारणकर्ता की विचारशक्ति, उसके कर्मों को कैसे प्रभावित करते हैं इत्यादि ऎसे विषय हैं, जिन्हे सही तरीके से समझने के लिए कईं लेखों की आवश्यकता है। यदि ईश्वर नें चाहा तो बहुत जल्द ही इन विषय पर आपको कुछ लेख पढने को मिलेंगें।