मन्त्र शक्ति का रहस्य

वेदों में कहा गया हैं कि ऋषियों मन्त्र दृ्ष्टार: अर्थात ऋषि वही है, जो मन्त्र को जानता है, जिसने उसकी गहराई को अनुभव और उपलब्धियों को हस्तगत किया है। ऋषियों के अनुभूत कोष स्पष्ट करते हैं कि विश्वव्यापी ब्रह्म चेतना के साथ मनुष्य का एक सघन और सुनिश्चित संबंध है। परन्तु उसमें मल विक्षेप आवरणों जैसे अवरोधों नें एक प्रकार से विक्षेप जैसी स्थिति पैदा कर दी है। इसे आप यूँ भी समझ सकते हैं कि बिजली के स्विच और कमरे में लगे पंखें के बीच लगे तारों में यदि कहीं कोई गडबडी हो जाए तो पंखा और बिजली दोनों के अपने अपने स्थान पर मौजुद रहते हुए भी सन्नाटा छाया रहेगा। मन्त्र जो हैं- वो इन शिथिल संबंधों को पुन: प्रतिष्ठापित करने वाली एक सुनिश्चित पद्धति है। शब्द के माध्यम से विश्व चेतना के साथ मनुष्य को जोडने वाला एक राजमार्ग है।
 शब्द की सामर्थ्य सभी भौतिक शक्तियों से बढकर, सूक्ष्म और विभेदन क्षमता वाली है----इस बात की निश्चित जानकारी होने के बाद ही मन्त्र विद्या का विकास भारतीत तत्ववेत्ता ऋषियों द्वारा किया गया। यों हम जो कुछ भी बोलते हैं , उसका प्रभाव व्यक्तिगत और स्मष्टिगत रूप से सारे ब्राह्मंड पर पडता है। पानी में फेंकें गये एक छोटे से कंकड-पत्थर की लहरें भी दूर तक जाती हैं, उसी प्रकार हमारे मुँह से निकला प्रत्येक शब्द, आकाश के सूक्ष्म परमाणुओं में कम्पन उत्पन करता है और उस कम्पन से लोगों में अदृ्श्य प्रेरणाऎं जागृ्त होती हैं।  
यह तो हुआ शब्द शक्ति का परोक्ष एवं स्थूल प्रभाव। इसी के साथ इसका एक ओर अपरोक्ष तथा सूक्ष्म प्रभाव भी होता है। जिसके बारे मे इसी ब्लाग पर कुछ लेखों के माध्यम से विस्तारपुर्वक पहले ही लिखा जा चुका है। जो इच्छुक सज्जन मन्त्र, शब्द शक्ति एवं विज्ञान विषय पर विस्तारित जानकारी चाहते हैं, वो चाहें तो इन लेखों को पढ सकते हैं।

मंत्र शक्ति पूर्णतय: ध्वनि विज्ञान के सिद्धान्तों पर आधारित है। इनमें प्रयुक्त होने वाले भिन्न भिन्न शब्दों का जो गुंथन है---वही महत्वपूर्ण है, अर्थ का समावेश गौण है। कितने ही बीज मन्त्र ऎसे हैं, जिनका खींचतान के ही भले ही कुछ अर्थ गढ लिया जाए, वस्तुत: उनका कुछ अर्थ है नहीं। ह्रीं, क्लीं, श्रीं, ऎं, हुं, यं, फट इत्यादि शब्दों का क्या अर्थ हो सकता है, इस प्रश्न पर कैसी भी माथापच्ची करना बेकार है। उनका सृ्जन इस आधार पर किया गया है कि उनका उच्चारण किस स्तर का शक्ति कम्पन उत्पन करता है। और उनका जप करने वाले, उसके अभीष्ट प्रयोजन तथा बाह्य वातावरण पर क्या प्रभाव पडता है। और जो मानसिक, वाचिक और उपांशु जाप की बात कही जाती है, उसमें भी सिर्फ ध्वनियों के हल्के भारी किए जाने की प्रक्रिया ही काम में लाई जाती है।   
 मैं समझता हूँ कि उपरोक्त लेखों सहित इस पोस्ट को पढकर आप शब्द तथा मन्त्र  की सामर्थ्य, शक्तियों एवं जगत पर पडने वाले उनके प्रभावों से अच्छे से परिचित हो चुके होंगें। चलिए इस विषय को ओर अधिक विस्तार न देते हुए पिछली पोस्ट में आपसे कहे अनुरूप आपको आज एक ऎसे मन्त्र के बारे में बताना चाहूँगा----जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव आप स्वयं अनुभव कर सकते हैं।
पारिवारिक अशान्ती, आपसी वैचारिक मतभेदो का हारक मन्त्र :-
कभी कभी ग्रह दोष अथवा अन्य किन्ही बाह्य या आन्तरिक कारणों के फलस्वरूप पति-पत्नि,पिता-पुत्र,भाई-भाई अथवा अन्य किन्ही सदस्यों के बीच आपसी मतभेद उत्पन होकर घर परिवार की शान्ती में विघ्न उत्पन हो जाता है। ओर ऎसा प्रतीत होता है कि जैसे सभी पारिवारिक सम्बंध बिगडते जा रहे हैं, जिनके कारण मन अशान्त एवं अधीर हो उठता है। हर समय कुछ अनिष्ट हो जाने का भय मन में बना रहता है। यहाँ मैं जो मन्त्र आपको बता रहा हूँ----ये जानिए कि ऎसी किसी भी स्थिति के उन्मूलन के लिए ये मन्त्र सचमुच रामबाण औषधि का कार्य करता है। ऎसा नहीं कि इसके लिए आपको कोई पूजा अनुष्ठान करना पडेगा या अन्य किसी प्रकार की कोई सामग्री, कोई माला इत्यादि की जरूरत पडेगी। न कोई पाठ पूजा, न सामग्री, न माला या अन्य कैसे भी नियम, विधि-विधान की कोई आवश्यकता नहीं और न ही समय का कोई निश्चित बन्धन। आप  अपनी सुविधा अनुसार जैसा और जब, जितनी मात्रा में चाहें उतना जाप कर सकते हैं। बस मन्त्र एवं मिलने वाले उसके सुफल के बारे में श्रद्धा बनाए रखिए तो समझिए कुछ ही दिनों में आपको इसका प्रत्यक्ष लाभ दिखलाई पडने लगेगा।
मन्त्र है :- ॐ क्लीं विघ्न क्लेश नाशाय हुँ फट  

जैसा कि मैं पहले कह चुका हूँ कि इस मन्त्र के साथ किसी भी प्रकार का विधि विधान,नियम इत्यादि का कोई बन्धन नहीं है। बस एकमात्र श्रद्धा होनी आवश्यक है। बिना श्रद्धा के तो दवा भी काम नहीं करती, फिर ये तो एक मन्त्र है। श्रद्धा और विश्वास इन दो बीजों  का विकास ही हमारा ये जीवन वृ्क्ष है और उल्लसित वर्तमान और उज्जवल भविष्य सतत श्रद्धा एवं विश्वास के द्वारा ही निर्मित होते हैं।
पुन: कहना चाहूँगा कि किसी चमत्कार की आशा न करते हुए सिर्फ अपने घरेलू पारिवारिक जीवन में उपस्थित आपसी तनाव, अशान्ती, विवादों से मुक्ति की अकांक्षा रखकर आप इस मन्त्र का नियमित रूप से जाप करें तो मैं यह बात दावे सहित कह सकता हूँ कि आपको स्वयं ही कुछ दिनों में सुधार दिखाई देने लगेगा।