अपनी बद्धमूल धारणाओं को त्याग कर ही किसी सत्य को जाना जा सकता है!!!

सर्वप्रथम तो समस्त इष्ट मित्रों तथा सुधि पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!
चलिए अब बात करते हैं मेरी पिछली पोस्ट के बारे में, जिसमें मैने अपने जीवन से जुडे एक विचित्र घटनाक्रम का उल्लेख आप लोगों के सामने किया था। उसमें आपने देखा होगा कि उस घटनाक्रम के विषय में मैने कैसा भी कोई विचार,कोई राय प्रकट नहीं की, बल्कि घटनाक्रम को सिलसिलेवार जस का तस आप लोगों के सामने रखा भर है।
जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि पिछले कईं महीनों से मैं इसी दुविधा से त्रस्त था कि इस वाकये को यहाँ साईट के माध्यम से पाठकों के समक्ष रखा जाए अथवा नहीं। हमारी इस साईट के जो नियमित पाठक हैं, वो मेरे मन की इस दुविधा को भली भान्ती समझ सकते हैं। क्यों कि वो जानते है कि ज्योतिष की सार्थकता नाम की इस वैबसाईट का अपने प्रारंभ से सिर्फ एक ही उदेश्य रहा है कि ज्योतिष, आध्यात्म, कर्मकाँड से जुडी निर्मूल भ्रान्तियो, भ्रम, अवधारणाओं को दूर कर वैदिक ज्ञान-विज्ञान के सही परिष्कृ्त स्वरूप से आप लोगों का परिचय कराया जा सके। ये नहीं कि बिना स्वयं जाने समझे, सिर्फ तोता रटंत किताबी ज्ञान के सहारे अपनी विद्वता का प्रदर्शन किया जाए बल्कि यहाँ सिर्फ वही सामग्री प्रस्तुत की जाती रही है, जिसे कि नवीन दृ्ष्टिकोण से अनुभव की कसौटी पर जाँचा परखा जा चुका है। चाहे इसके लिए हमें अपनी धारणाओं में परिवर्तन ही क्यों न करना पडा। वैसे भी यदि हम किसी अन्तिम निष्कर्ष तक पहुँचना चाहें तो अपने स्वयं के दृ्ष्टिकोण का त्याग करना ही पडता है, तभी हम उसमें निहित सत्य के अंतिम छोर तक पहुँच सकते हैं। अपनी बद्धमूल धारणाओं को छोडकर ही हम सिक्के के दूसरे पहलू को देख सकते हैं। यदि ऎसा न हो तो हम चाहे जितना प्रयास कर लें,हमारी आँखों को वो ही सब दिखाई देगा,जो कि हमारी धारणा हमें दिखलाना चाहती है।

चलिए अब मूल विषय पर वापिस आते हैं। पिछली पोस्ट में मैने आपको एक ऎसे व्यक्ति के बारे में बताया था, जो कि किसी अन्जान व्यक्ति को देखकर ही उसका नाम और उसके बीते जीवन की किसी घटना के बारे में बता देता है। आप लोगों नें उस पोस्ट को पढा, उस पर अपने विचार भी प्रस्तुत किए। जहाँ कुछ लोगों ने इसे चमत्कार माना तो किसी नें सिद्धि-साधना का प्रतिफल। साथ ही कुछ लोगों नें इसके वैज्ञानिक अध्ययन की भी इच्छा जाहिर की। मैं स्वयं भी यही मानता हूँ कि कभी कभी अविज्ञात के अन्तराल से ऎसी जो घटनाएँ जीवन में घट जाती हैं, जिनका कि साधारण बुद्धि द्वारा विवेचन करना तो दूर उसका कार्य कारण से भी कोई संबंध नहीं स्थापित किया जा सकता। उन्हे ईश्वर का कोई चमत्कार मानकर चुप्पी साध जाने की अपेक्षा उनका वैज्ञानिक विश्लेषण होना चाहिए। ओर ये भी नहीं कि भाई जाकिर अली(जो कि विज्ञान को जेब में लिए घूमते हैं) की तरह किसी भी तथ्य को पढते ही गलत है, गलत है, गलत है की रट लगाने लगें :)

आगामी पोस्ट में इस विषय पर अपने दृ्ष्टिकोण अनुसार अपने मन के विचार आप लोगों के सम्मुख रखने का प्रयास करूँगा।