ग्रह गोचर प्रणाली एवं राहू के धनु राशी में प्रवेश का वैश्विक् प्रभाव

प्राय: चलन में देखा जाता है कि एक सामान्य व्यक्ति को अपनी नामराशी तो पता होती है किन्तु वो अपनी जन्मराशी, जन्मलग्न इत्यादि के बारे में पूरी तरह से अनभिज्ञ होता है । लेकिन अपना भविष्य जानने की उत्सुकता, जिज्ञासावश वो चाहता है कि ज्योतिषी को केवल अपनी नामराशी बताए और ज्योतिषी हमारा भविष्य बाँच दे । ऎसी स्थिति में केवल ग्रह गोचर भ्रमण प्रणाली ही एक मात्र पूर्ण प्रणाली है । इसी कारण गोचर प्रणाली का चलन दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है  और यह प्रणाली एक ऎसी प्रणाली के रूप में पहचान पा रही है, जो तुरन्त ही व्यक्ति को उसके भविष्य के बारे में आंशिक जानकारी दे देती है ।

किसी भी व्यक्ति का जीवन गोचर में भ्रमण कर रहे ग्रहों से अछूता नहीं है । सभी कहीं न कहीं गोचर के ग्रहों की क्रिया प्रतिक्रिया का परिणाम ही भोगते हैं । किन्तु यह बात अपूर्ण् है । इसकी पूर्णता हेतु व्यक्ति विशेष की जन्मकुंडली को भी देखना परम आवश्यक है; अर्थात गोचरस्थ ग्रहों की जन्मकालीन ग्रह स्थिति से क्या क्रिया-प्रतिक्रिया है, इस पर विचार करना भी बहुत जरूरी है ।  आजकल कुछ विद्वान तो केवल ग्रह गोचर को देखकर ही भविष्य कथन करने लगे हैं--लेकिन यह एक बिल्कुल ही गलत चलन है । आप यदि ज्योतिष विद्या के अच्छे ज्ञाता हैं तो गोचर के माध्यम से चाहे सम्पूर्ण विश्व अथवा किसी राष्ट्र/क्षेत्र विशेष की सामाजिक , आर्थिक अथवा राजनैतिक इत्यादि स्थिति का भावी आंकलन तो कर सकते हैं । किन्तु उसका व्यक्तिगत प्रभाव क्या होगा ? यह जानने के लिए जन्मकालीन ग्रह स्थिति (जन्मकुंडली) के अतिरिक्त अन्य कोई माध्यम नहीं है ।
अब यदि कोई व्यक्ति किसी ग्रह के गोचर भ्रमण को लेकर व्यक्तिगत भविष्यकथन करता है तो ये ज्योतिष नहीं बल्कि ज्योतिष विद्या के नाम पर सिर्फ मजाक किया जा रहा है ।
चलिए अब बात करते हैं राहू के धनुराशी में प्रवेश की ।
राहू का धनु राशी में प्रवेश :-
 राहू का धनुराशी (उत्तराषाढा नक्षत्र) में प्रवेश हो चुका है, जिसके परिणामस्वरूप आगामी 13 दिसंबर 2009 तक भारतवर्ष में कहीं बम विस्फोट, अग्निकाँड, वायुयान दुर्घटना, जातीय/प्रांतीय संघर्ष अथवा उपद्रव होने का योग बन चुका है । नेपाल, चीन आदि देशों एवं आसाम-त्रिपुरा,अरूणाचल,मेघालय,मणिपुर,नागालैण्ड आदि  भारत के पूर्वोतर राज्यों में इसका प्रभाव विशेष रूप से दिखाई देगा । इन राज्यों में किसी स्थान पर प्राकृ्तिक प्रकोप से भारी जनधनहानि के भी योग है । 19,22,27,28 एवं 29 नवम्बर को कश्मीर, भूटान, शिलांग,हिमाचल प्रदेश, एवं उत्तरप्रदेश में कहीं वायुवेग के साथ वर्षा व बून्दाबांदी होगी, शरद ऋतु का प्रभाव बढने लगेगा ।  भारतीय राजनीति में विशेष चिन्तनीय समस्याएं उपस्थित होंगी । अनुसूचित जाति,जनजाति एवं पिछडे वर्गों को( यथा आरक्षण इत्यादि) लेकर कोई मुद्दा गर्माने लगेगा ।
वैश्विक स्तर पर भी यह समय अभूतपूर्व कठिन परिस्थितियों वाला सिद्ध होगा । यवन (मुस्लिम) राष्ट्रों के लिए समय बहुत भयावह रहेगा, किसी विशिष्ट व्यक्ति की आकस्मिक मृ्त्यु से शोक व्याप्त होगा ।

1 दिसंबर को बुध और राहू की युति 9 दिसंबर के मध्य अफवाहों के साथ वायदा बाजार में एकतरफा जोरदार तेजी/मन्दी के रूख का कारण बनेगी । अत: जो व्यक्ति  COMODITY TRADING, STOCK MARKET संबंधित कार्य व्यवसाय में लगे हुए हैं, उन्हे थोडा अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। अन्यथा अप्रत्याशित हानि का सामना करना पड सकता है ।