श्री कृ्ष्ण जन्माष्टमी की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं!!!!!




     बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।
   अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम॥
     पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज।
    जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज

श्री कृ्ष्ण जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं!!!!!

आज  श्री कृ्ष्ण जन्मोत्सव के इस पावनपर्व के अवसर पर हमारे हृदयों में भी श्रीकृष्ण का जन्म होना चाहिए।
"जहां पाप है वहां पाप-पुंजहारी भी हैं"। इस आश्वासन का हमारे हृदय में संचार हो ताकि मध्य रात्रि के गहन अन्धकार में श्री कृष्ण का उदय हो सके। यदि ऎसा होता है तो ही ये निराश विश्व आश्वासन पा सकता है और अपने धर्म में दृढ़ संकल्प रह सकता है।
आज इस युग की ये जरूरत भी है कि हम लोग कृ्ष्ण को जानकर उनके वचनामृ्त को आत्मसात करने का प्रयास करें।