स्वरोदय के माध्यम से शुभाशुभ फल विचार

स्वरोदय अर्थात नाक के द्वारा सांस का चलना। शकुन और कार्य की पूर्णता और अपूर्णता की प्रत्येक समय,प्रत्येक दशा में सूचना प्रत्येक प्राणी को उसके नाक के द्वारा प्राप्त होती है। यह ज्ञान बहुत ही सूक्ष्म होने पर भी कठिन नहीं है,बल्कि इसे कोई भी व्यक्ति बहुत ही आसानी से समझ सकता है। और वास्तविक रूप से सत्य का ज्ञान भी कराता है। स्वयं मैने  इस स्वरोदय के आधार पर जब जब  भी किसी उत्सुक को उसके प्रश्न का उत्तर दिया तो वह शत प्रतिशत सत्य घटित हुआ है। 'इदं स्वरोदयं शास्त्रं सर्वशास्त्रोत्तमम" अर्थात सम्पूर्ण शास्त्रों में श्रेष्ठ यह ज्ञान है। इस स्वरोदय ज्ञान की महिमा वास्तव में अनन्त है।

स्वरज्ञानात्परं गुह्यृ स्वरज्ञानात्परं धनम। स्वरज्ञानात्परं ज्ञानं न वा दृ्ष्टं न वा श्रुतम !!
उपरोक्त श्लोक सदाशिव भगवान शंकर जी ने भगवती पार्वती के प्रश्नों के उत्तर में दिया था। जिसका अर्थ है -"स्वर ज्ञान से बढकर कोई गुप्त विधा,स्वर ज्ञान से ही अधिक धन आदि, स्वर ज्ञान से भी बढकर कोई भी ज्ञान न देखा, न सुना ही गया !"

स्वर की पहचान- नाक में दो छिद्र होते हैं और इकट्ठे इन दोनों छिद्रों से श्वास कभी कभी ही चलता है। जब की कुछ समय का अन्तर देकर कभी दाहिने पार्श्व तो कभी बाएं पार्श्व से श्वास चलता है। जब दोनों स्वर चल रहे होते हैं तो उसे सुषुम्ना कहा जाता है। दाहिने नासा छिद्र से श्वास चले तो पिंगला और बाएं तरफ से श्वास चलने को इडा कहते हैं। माना जाता है कि इडा,पिंगला,सुषुम्ना व्यक्ति के प्राण मार्ग पर स्थित हैं।
अनुभवसिद्ध है कि शकुन अथवा किसी प्रश्न के उत्तर के लिए नाक से चल रहे श्वास को समझकर कोई कार्य करें तो उत्तम फलदायक सिद्ध होता  है।

सुषुम्ना- प्राणी के शरीर में स्थित सुषुम्ना समस्त कार्यों के लिए विपरीत अथवा अशुभ ही मानी जाती है। इसके चलते अगर आप इसी कार्य हेतु प्रस्थान करें तो वो कार्य कभी भी फलीभूत नहीं हो सकता। केवल पूजा-पाठ,अनुष्ठान इत्यादि धार्मिक कृ्त्य ही इस स्वर के चलते सफल होते हैं।

ईश्वरे चिन्तिते कार्यं योगाभ्यासादि कर्म च ! अन्यत्र न कर्तव्यं जय लाभ सुखैषिभि:!!

पिंगला- इस श्वास के चलते नदी/समुद्र पार की यात्रा, चिकित्सकीय कार्य, विधारम्भ,वाहन खरीदना, योगाभ्यास,अध्य्यन,भोजन,शेयर इत्यादि खरीदना,मशीनरी,गृ्होपयोगी सामान खरीदना जैसे कार्य सदैव सिद्ध होते हैं।

इडा- जब इडा अर्थात बाएं नासा छिद्र से श्वास चल रहा हो तो गृ्हप्रवेश, खेतीबाडी,मित्रता,व्यापार,अनाज संग्रह,विवाह,वस्त्र-आभूषण-सौन्दर्य प्रसाधन इत्यादि खरीदना,धार्मिक अनुष्ठान,कठिन/गम्भीर रोगों की चिकित्सा, भूमी खरीदना,स्त्री श्रंगार,नौकरी इत्यादि के लिए इन्ट्रव्यू देने जाना,संगीत-नृ्त्य सीखना प्रारंभ करना आदि कार्य शुभ रहते हैं।

विषय विस्तार के भय से आज बस यहीं समाप्त करता हूं। आगामी पोस्ट के माध्यम से आपको इस विषय में जानकारी प्रदान की जाएगी कि शरीर के विभिन्न अंगों में उत्पन्न तिल किस प्रकार आपके आगामी भविष्य को सूचित करते हैं।