ये ज्योतिष नहीं हो सकता

>> Tuesday, 25 November, 2008

बाजार से गुजरते वक्त कभी-कभी कोइ ज्योतिषी महाशय पिंजरे में बन्द एक तोते के साथ सड्क पर आसन लगाए नजर आ जाते हैं. उनके पास बन्द लिफाफो में कुछ कार्ड रखे होते हैं. अब जैसे ही कोई व्यक्ति उनके पास प्रश्न पूछने के लिए आता है तो वो ज्योतिषी महाराज पिंजरे का मुंह खोल देते हैं जिससे कि तोता पिंजरे से बाहर आकर उन लिफाफो में से एक कार्ड अलग करके वापस पिंजरे में चला जाता है. अब वह ज्योतिषी उस कार्ड पर लिखे को पढ्ता है तथा प्रश्नकर्ता को बताता है कि उसके भाग्य में ये सब लिखा है. मान लो प्रश्नकर्ता दोबारा से अपना भाग्य जानना चाहे, तो ज्योतिषी फिर से उसी पहले वाली प्रक्रिया को दोहरायेगा. लेकिन इस बार दूसरा कार्ड हाथ में होगा जिसका फलादेश पहले वाले कार्ड से भिन्न होगा. इसी प्रकार जितनी बार प्रश्न किया जायेगा, उतनी ही बार उस व्यक्ति का भाग्य बदल जायेगा. कभी अच्छा भाग्य होगा तो कभी बुरा. ज्योतिष के नाम पर ये ढोगी मनुष्यो की भावनाओ के साथ खिलवाड् करते है. इसका सबसे अधिक बुरा प्रभाव ज्योतिष विद्या पर पड्ता है तथा जिन लोगो का इस विद्या पर विश्वास नहीं है, वो अपने आप को सही सिद्ध करने के लिए ऎसे अवसरो की तलाश में रहते हैं. इस समस्या का सबसे अच्छा निदान यही है कि हम ऎसे ढोगी बाबाओ के पास न जाकर ठगे जाने से बचे.

आजकल टैराँट कार्ड (Tarrot Card) बहुत प्रचलन में हैं विशेषकर बडे शहरों में जैसे कि दिल्ली, मुम्बई इत्यादि. ज्यादा पढे-लिखे व समझदार लोग ही इस विद्या का प्रयोग करते हैं. टेरो कार्ड में ताश की तरह पत्ते होते हैं. जब कोई व्यक्ति टेरो एक्सपर्ट के पास अपना भविष्य पूछने जाता है तो टेरो एक्सपर्ट एक कार्ड निकालकर जिज्ञासु के स्वभाव इत्यादि को पढ्ता है, जोकि पुर्ण रुप से मनोविज्ञान होता है. यदि एक ज्योतिषी को मनोविज्ञान की जानकारी है तो ज्ञान की दृष्टि से उसके लिए लाभकारी है तथा मनोविज्ञान ज्योतिष से पहले की अवस्था है. परन्तु मनोविज्ञान को ही हम ज्योतिष नहीं मान सकते. अतः टैरो कार्ड एक जुए की तरह का मनोविज्ञान है, जिसे पढ कर आप केवल प्रसन्न हो सकते हैं

1 टिप्पणियाँ:

sudhir narang 3 December, 2008 10:40 AM  

bilkul sahi likha hai aapne.

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