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मेष :- व्यस्तता भरा माह है. आर्थिक, सामाजिक व पारिवारिक कार्य पूर्ण होंगें. 19 जून के पश्चात घरेलू स्तर पर कुछ परेशानियों का सामना अवश्य करना पडेगा परन्तु व्यवसायिक कार्य पूर्ण होंगें. यदि आप नौकरी में हैं तो सूर्यदेव पदस्थापन दिलाने वाले है. शुक्र जहाँ आपकी परेशानियों को नियन्त्रित कर रहा है, वहीं आपको मित्र सुख व नवीन वस्त्रादि पर व्यय करने को प्रेरित कर रहा है. यात्रा-भ्रमण एवं भौतिक सुख संसाधनों पर व्यय की मात्रा बढी रहेगी.
शुभ तिथियाँ:- 2,3,7,9,10,15,25,30
अशुभ तिथियाँ:- 6,8,13,18,24,28
उपाय:-
(1) प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार के दिन संध्या समय श्री सुन्दरकांड का पाठ करें.
(2) प्रात: मीठा खाकर एवं पानी पीकर ही घर से प्रस्थान किया करें.

वृषभ:- किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए तीव्र परिश्रम करना पडेगा. व्यवसायिक लाभ मिलेंगें. 4 से 11 जून की मध्यावधि में नैतिक-अनैतिक सोच और भौतिक परिवेश में तालमेल बना पाने में स्वयं को असमर्थ पायेंगें. शत्रुकृत गतिविधियाँ मानसिक चिन्ता एवं परेशानी का कारण बनने वाली हैं. माह के उतरार्द्ध में रचनात्मक कार्य बनने लगेंगें. भू-सम्पति के क्रय-विक्रय से जुडे जातकों को यथेष्ठ लाभ प्राप्ति के चन्द अवसर उपलब्ध होंगें. इसके अतिरिक्त विदेश जाने के इच्छुक जातक यदि अपने प्रयास में थोडी तीव्रता ला सकें तो यह माह उनकी इच्छापूर्ती हेतु अति महत्वपूर्ण सिद्ध होने वाला है.
शुभ तिथियाँ:- 1,5,10,12,23,24,29
अशुभ तिथियाँ:- 2,3,13,16,18,19,26
उपाय:-
(1) "ॐ तत्वनिरंजनाय तारकरामाय नम:" मन्त्र का जाप करें.
(2) प्रत्येक गुरूवार के दिन पीली खाद्य वस्तु का दान अवश्य करते रहें.

Pandit Dinesh 31 August, 2016
मासिक राशिफल----------मई 2013
यह मासिक भविष्यफल जन्मराशि पर आधारित है । अत: सही फलादेश के लिए नामराशि की अपेक्षा अपनी जन्मराशि के अनुसार ही इसे पढें । यदि किसी को अपनी जन्मराशि की जानकारी नहीं है, तो ईमेल के जरिए अपना जन्म विवरण प्रेषित कर अपनी राशि मालूम कर सकते हैं ।

मेष राशि:- माह का पूर्वार्ध आपके लिए बेहद सकारात्मक रहेगा. शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक प्रफुल्लता बरकरार रहेगी. अभी तक आपके जो भी कार्य अटके पडे थे, वे सभी भाग्य के सहयोग से पूर्णता को प्राप्त होने लगेंगें. इस समय भाग्य का प्रबल साथ-सहयोग मिलने वाला है, फ़ायदा उठायें. हालाँकि जीवन साथी का स्वास्थ्य थोडा कमजोर बना रहेगा और उनसे किंचित वाद-विवाद व मनोमालिन्य की स्थितियाँ यदा-कदा निर्मित होती ही रहेंगीं. समझदारी से काम लें.
माह के पूर्वार्ध में मन की चंचलता बढी हुई रहेगी. वाणी पर संयम बनाये रखें. अकारण ही थोडा अस्वस्थता का अनुभव करेंगे. मित्र, नाते-रिश्तेदारों से आपकी अपेक्षाएं बढी हुई रहेंगी, जिनके पूरा ना होने से आपको झुंझलाहट हो सकती है. साथ ही व्यर्थ की भगदौड भी बनी रहेगी. जीवन साथी से मासांत आते-आते सम्बंध सु-मधुर हो सकेंगें. मानसिक एकाग्रता बनाये रखें तो विद्यार्थियों के लिये यह समय मनोवांछित सफ़लता प्रदान करने वाला सिद्ध होगा. अभक्ष्य पदार्थों का सेवन कदापि ना करें.

शुभ तिथियाँ:- 3,5,7,13,14,27,28
उपाय :-
(1) पीपल के वृक्ष का नित्य जल से सिंचन करते रहें.

(2) मस्तक पर नित्य प्रात: पीले चंदन का तिलक लगायें.
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वृष राशि:- माह की शुरूआत से ही आपका प्रराक्रम बढा रहेगा. मेहनत करने से पीछे नही हटेंगे. रोजी-रोजगार में अच्छी सफ़लता के योग बन रहे हैं, विशेषत: नौकरी पेशा व्यक्तियों के लिये यह समय काफ़ी बढिया रहने वाला है. भ्रमण, मनोरंजन और विलासिता के कारण खर्च करने की क्षमता बढी रहेगी, जिसकी वजह से मासान्त में स्वयं पर किंचित क्रोध का आना तो स्वाभाविक है. विदेश जाने हेतु प्रयासरत्त जातकों को इस दिशा में यह समय सफ़लता प्राप्ति के संकेत दर्शा रहा है.
माह का उतरार्ध आजीविका प्राप्ति के लिहाज से काफ़ी अच्छा रहेगा. जिससे कि बेरोजगार जातकों को यह समय रोजगार दिला पाने में सहायक रहेगा. समय का सदुपयोग करें क्योंकि मानसिक रूप से आप अपने आसपास बहुत सी ऋणात्मक उर्जा का संचय करते जा रहे हैं,जिसके फलस्वरूप आपमें आलस्य और प्रमाद हावी रहेगा.

शुभ तिथियाँ:-17,22,24,25,26,27
उपाय :-
(1) चींटियों को चावल, शक्कर मिश्रित कर डालते रहें.
(2) प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर अंजुल भर सफेद पुष्प चढाया करें.
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मिथुन राशि:- इस माह का प्रारंभ आपके लिये धनदायक रहने वाला है. अविवाहित जातकों के विवाह हेतु रिश्ते की बात पक्की हो सकती है. कार्य-व्यवसाय में भरपूर सफ़लता मिलती रहेगी. हालाँकि 9 तारीख से किसी मूल्यवान वस्तु की चोरी अथवा किसी नजदीकी व्यक्ति से झगडे के योग निर्मित हो रहे हैं, अत: विशेष तौर पर सावधानी बनाये रखें.

माह के उतरार्ध में घर परिवार में किसी नये सदस्य आगमन की संभावना है. कोई शुभ प्रसंग की खबर मिलेगी. इस समय में आपके खर्चे काफ़ी बढे हुये रहेंगे. भ्रमण मनोरंजन के लिये बाहर जाने का अवसर मिलेगा. कुल मिलाकर आय-व्यय बराबर रहकर यह माह आपके लिए सुख एवं शांतिपूर्वक व्यतीत होने वाला है.

शुभ तिथियाँ:- 2,6,8,9,10,16,24
उपाय :-
(1) रूद्राभिषेक करें और शिव चालीसा का पाठ करते रहें.
(2) जलपूरित घट का दान करें.
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कर्क राशि:- माह के प्रारंभ से ही शरीर में रूग्णता महसूस करेंगे. जो व्यक्ति पहले से ही किसी रोग से पीडित रहे हैं, उनका पुराना रोग पुन: फ़िर से उभर आने की संभावना है. साथ ही स्वयं की माता अथवा घर की किसी बुजुर्ग स्त्री हेतु भी यह समय किंचित कष्टकारक रहने के कुयोग निर्मित हो रहे है.

माह के उतर्रार्ध में ही रोगादि भय से छुटकारा मिल पाएगा. लेकिन धन, व्यापार एवं व्यवसाय मे किंचित रूकावट अनुभव करेंगे. जीवन साथी से संबंध किंचित तनावपूर्ण रहेंगे लेकिन इष्ट-मित्रों का अच्छा साथ सहयोग मिलता रहेगा. बेरोजगार जातकों को आजीविका पक्ष में मनोनुकूल सफ़लता प्राप्ति के अति उत्तम योग निर्मित हो रहे है. किसी परीक्षा/प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे जातक समय का यथेष्ट लाभ उठा पायेंगें.

शुभ तिथियाँ:-1,7,10,16,22,29,30
उपाय:-
(1) गाय को हरा चारा खिलाएं.
(2) श्री गणपति स्तोत्र का नित्य पाठ करें.
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सिंह राशि:- माह के प्रारंभ से ही भाग्य का सुंदर साथ मिलेगा. अभी तक के अटके कार्य अल्प प्रयास से ही संपूर्णता को प्राप्त होंगे. धार्मिक कार्यों में खर्च होगा और मन प्रफ़ुल्लित रहेगा. संतान प्राप्त होने के प्रबल योग हैं. 

माह के उतरार्ध में धन का आगमन सहज होगा. व्यापार व्यवसाय में सफ़लता प्राप्त होकर आशातीत लाभ प्राप्त होने की संभावना है. लेकिन आपके खर्चे भी उसी अनूरूप बढे हुये रहेंगे. विदेश गमन के इच्छुक व्यक्तियों को आसानी से वीजा प्राप्त होने की संभावना है. मन में किंचित खिन्नता महसूस होगी लेकिन अपने कर्म में कमी ना आने दें, सफ़लता मिलेगी. माँस-मदिरा इत्यादि तामसिक अभक्ष्य पदार्थों का सेवन न करें.

शुभ तिथियाँ:- 1,2,6,7,9,11,14,15,23
उपाय :-
(1) शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे धूपबत्ती लगायें.
(2) ॐ नारायणाय सुरसिंहासनाय नम: मंत्र का नित्य जाप करें।
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कन्या राशि:- माह के प्रारंभ में मन अनायास खिन्न रहेगा. कोई भी कार्य करने में मन नही लगेगा. बेवजह आलस्य और प्रमाद हावी रहेगा. मन की चंचलता अतिशय बढी हुई रहेगी इस वजह से झुंझलाहट और परेशानी ज्यादा बडेगी. मन-मस्तिष्क में ऋणात्मक भावों की अधिकता रहेगी. अंधविश्वास जैसी कुरीतियों के प्रति रूझान बढेगा. कोर्ट-कचहरी अथवा किसी राजकीय कार्य हेतु धन का वृथा व्यय होने का अंदेशा है.
4 तारीख के पश्चात कोई पुराना रूका हुआ धन या बीमे की राशि प्राप्त होने की इस समय प्रबल संभावना है. यदि आपका धन कहीं फंसा हुआ है तो आलस्य एवं संकोच का त्याग कर प्रयास आरम्भ करें, धन मिलने में आसानी रहेगी. यह समय इंजीनियरींग तथा किसी शोधरत्त छात्रों को अपने कार्य में अच्छी सफ़लता मिलने का है.
माह के उतरार्ध में आपको भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा. हालाँकि थोडा परिश्रम की अधिकता अवश्य रहेगी किन्तु आपको उसका प्रतिफल भी अवश्य ही प्राप्त होगा. संतानेच्छुक दम्पत्ति प्रयास करें तो गर्भधारण की प्रबल संभावनायें बन रही हैं.

शुभ तिथियाँ:- 6,7,9,16,19,24,27,29
उपाय :-
(1) कीडे-मकौडों को तिल चावल मिश्रित कर डालते रहें.
(2) जल सेवा करें.
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तुला राशि:- माह के प्रारंभ में शरीर ऊर्जावान रहेगा जिसकी बदौलत आप दुगुने उत्साह से कार्य कर पायेंगे. व्यापार व्यवसाय में आशातीत सफ़लता प्राप्त होगी. घर परिवार व जीवन साथी से बढिया तालमेल बना रहेगा, घर में शादी-विवाह योग्य सदस्यों के लिये रिश्ते की बात तय हो सकती है. 4 से 11 तारीख मध्य थोडा सचेत रहें, क्योंकि किसी वस्तु की चोरी अथवा गुम हो जाने की प्रबल संभावनाएं बन रही हैं, इसके अतिरिक्त किसी लडाई-झगडे के प्रति भी सावधान रहें. व्यर्थ ही किसी से उलझाव की स्थिति न बनने दें.

माह के उतरार्ध में शरीर में आलस्य रहेगा.दलाली कार्य से संबंधित व्यक्तियों को लाभ में कमी की वजह से मानसिक चिन्ता एवं खिन्नता का शिकार होना पडेगा. वृथा भ्रम एवं रूढियां मन पर हावी रहेंगी. आलस्य आदि का त्यागकर कार्य में मन लगायें, कार्य अवश्य पूरे हो सकेंगे.

शुभ तिथियाँ:-2,3,12,15,23,29,30

उपाय:-
(1) नित्यप्रति रूद्राभिषेक करें.
(2) त्रि मुखी रूद्राक्ष धारण करें.
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वृश्चिक राशि:- माह के प्रारंभ से ही शरीर में रुग्णता रहेगी, पुराने रोग कष्ट दे सकते हैं. पुराने लिये कर्ज को चुकाने की भी चिंता रहेगी. यह समय छात्रों के लिये सफ़लता प्राप्त करने में सहयोगी रहेगा. ननिहाल पक्ष की ओर से किसी सुखद समाचार की प्राप्ति हो सकती है.

माह के उतरार्ध में भाग्य का अच्छा सहयोग मिलेगा. धार्मिक कार्यों में मन लगेगा. लेकिन जीवन साथी से किसी प्रकार की कटुता ना रखें. जीवन साथी को प्रसन्न रखेंगे तो भाग्य का प्रबल सहयोग मिलकर सभी काम बन जायेंगे. जो जातक धातु अथवा विधुत संबंधी कार्यों में संलग्न हैं, उनके लिए आगामी मास में भरपूर लाभ प्राप्ति हेतु परिस्थितियों का निर्माण हो रहा है. किसी भी तरह का निवेश आपके लिए हितकारी रहेगा.

शुभ तिथियाँ:-16,20,22,24,25,29
उपाय :-
(1) गौ सेवा करें.
(2) गले में चाँदी धारण करें.
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धनु राशि:- माह की शुरुआत में तन मन अध्यधिक स्वस्थ और प्रफ़ुल्लित रहेगा. इस समय में आपको शरीर, बुद्धि और भाग्य का अदभुत सहयोग मिलेगा. यही समय है जिसमें आप अपने सभी पुराने रूके कार्यों को निपटा लें और समय का सदुपयोग करें. संतान की तरफ़ से साथ-सहयोग मिलता रहेगा. मन की प्रसन्नता भी बरकरार रहेगी.

माह के उतरार्ध में कुछ शारीरिक कष्ट रहेगा, आलस्य प्रमाद हावी रहेगा. विचारों में रूढिवादिता हावी रहेगी. अपने आसपास भ्रमपूर्ण स्थितियों को न पनपने दें ओर किसी व्यक्तिविशेष के प्रति अपने मन में चल रहे अविश्वास को समाप्त करने के पूर्ण प्रयास करें. अन्यथा आप किसी महत्वपूर्ण सम्बन्ध को खो देंगें. इस समय पर आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि छोटी छोटी बातों को बडा करके न देखें. माँस-मदिरा इत्यादि तामसिक अभक्ष्य पदार्थों का सेवन न करना ही आपके हित में रहेगा.

शुभ तिथियाँ:-11,15,17,19,26,27
उपाय :-
(1) मस्तक पर नित्य सफ़ेद चंदन का तिलक लगायें.
(2) “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:” मन्त्र का जाप करें.
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मकर राशि:- माह के प्रारंभ से ही मन चंचल और आशिक मिजाजी में रहेगा. विपरीत लिंगियों की तरफ़ विशेष आकर्षण रहेगा. बहुत सोच समझकर कदम बढायें, व्यर्थ की बदनामी मिल सकती है. यदि मन के अपेक्षा बुद्धि से काम लेंगे तो पुराने चले आ रहे प्रेम प्रसंग को मंजिल हासिल हो सकती है. यह समय भ्रमण मनोरंजन, आमोद प्रमोद और भोग विलास की सामग्रियां पर खर्च करने में ही व्यतीत होगा. पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें.

माह का उतरार्ध काफ़ी अहम साबित होगा. यदि पूर्व में की गई अपनी गलतियों और लापरवाही को आपने नहीं दोहराया तो आप आगे आने वाले अच्छे समय में इसका निश्चित ही फ़ायदा उठाने में कामयाब रहेंगे. प्रेम प्रसंग, व्यापार कारोबार में सफ़लता के योग हैं. जीवन साथी से तालमेल मधुर बना रहेगा. जोखिम लेने की प्रवृति पर थोडा संयम रखें. 19 से 27 तारीख मध्य शेयर बाजार में किसी प्रकार का अल्पकालीक निवेश करने से यथासंभव बचें अन्यथा नुक्सान होना निश्चित जानिए.

शुभ तिथियाँ:-8,16,19,20,24,27,28

उपाय :-
(1) दुग्ध, शरबत इत्यादि किसी पेय पदार्थ का दान करते रहे. 
(2) पक्षियों को सफ़ेद ज्वार डालें.
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कुंभ राशि:- माह का पूर्वार्ध आपके लिए काफ़ी भागदौड वाला रहेगा लेकिन इस भागदौड का समुचित फ़ल आपको प्राप्त होगा. यह समय ज्ञान प्राप्ति में विशेष सहायक रहेगा एवं विद्यार्थियों को मेहनत अनूरूप अच्छी सफ़लता प्राप्त होने के योग हैं. जो जातक बहुत लम्बी समयावधि से किसी रोगादि का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह समय थोडा कष्टमय वातावरण का निर्माण कर सकता है. अपने खान पान व डाक्टर की सलाह पर अवश्य ध्यान दे.

माह का उतरार्ध भ्रमण-मनोरंजनपूर्वक एवं मित्रादि सहित शांति पूर्वक व्यतीत होगा. प्रेम प्रसंगों में सफ़लता मिलेगी. किसी विशेष महत्वपूर्ण कार्य हेतु ऋणादि लेने की आवश्यकता पड सकती है. सेहत का विशेष तौर पर ख्याल रखें.

शुभ तिथियाँ:-2,7,15,16,19,23
उपाय :-
(1) सुस्वादु एवं स्वास्थ्यवर्धक खान पान रखें.
(2) एकादश मुखी रूद्राक्ष धारण करें.
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मीन राशि:- माह के पूर्वार्ध में घर परिवार में कोई शुभ प्रसंग का अवसर आयेगा. आपकी वाणी में काफ़ी ओजस्विता रहेगी जिससे आपके सभी कार्य सहज रूप से बन जायेंगे. धनागमन की अच्छी संभावना है. कार्य रोजगार उत्तम रहेगा. माता के स्वास्थ्य में गिरावट हो सकती है. किसी मित्र की तरफ़ से कोई अशुभ समाचार प्राप्त हो सकता है.

माह का उतरार्ध काफ़ी भागदौड से पूर्ण एवं थका देने वाला रहेगा. क्रोध और चिडचिडापन बढने वाला है, जिस पर संयमपूर्वक काबू रखना आवश्यक है. बुद्धि के उपयोग से सभी कार्य पूर्ण हो सकेंगे. अपना संतुलन ना खोंये. संतान पक्ष की ओर से सुखद समाचार मिलेगा. विद्यार्थियों के लिये समय उत्तम है बशर्तें संयम से मेहनत करते रहें.

शुभ तिथियाँ:-4,21,23,24,25,30
उपाय :-
(1) श्री भैरव चालीसा का नित्य पाठ करें.
(2) शनिवार का उपवास रखें.
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Pandit Dinesh 03 May, 2013
मासिक राशिफल--------अप्रैल 2013

मेष राशि:- माह के पूर्वार्ध में अस्वस्थता रहेगी, विषेशकर छाती फ़ेफ़डे व घुटने के विकार से परेशान रह सकते हैं. शरीर में निर्बलता, आत्मिक और मानसिक अशांति बनी रहेगी. जूए, सट्टे, लाटरी, शेयर मार्केट से यथा संभव दूरी बनाए रखें अन्यथा भारी हानि का सामना करना पड सकता है. माता का स्वास्थ्य किंचित परेशानी दे सकता है. मित्रों को साथ मिलेगा पर उनकी बात अति उत्साह में आकर ना मानें बल्कि स्व विवेक से निर्णय लें.
जहां तक हो सके माह के पूर्वार्ध में चारित्रिक संयम बनाये रखें अन्यथा मानहानि का सामना करना पड सकता है. माह के उतरार्ध में शरीर में स्वस्थता का अनुभव करेंगे, अभी तक जो मनोबल क्षीण था उसकी जगह मन में एक नई आशा का संचार होगा. प्रेम संबंधों मे आंशिक रूप से सफ़लता मिल सकती है. यदि विवाहित हैं तो जीवन साथी से अच्छा सामंजस्य बना रहेगा. विद्यार्थियों को माह के अंत में ऎच्छिक सफ़लता प्राप्ति के संयोग बनेंगे.    
शुभ तिथियाँ:-1,7,10,16,22,29,30
उपाय :-
(1) बडे बुजुर्गों की सेवा करके उनसे आशीर्वाद लेते रहें
(2) गुरूवार के दिन मंदिर में बेसन/ चने की दाल इत्यादि का दान करते रहें
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वृष राशि:-अप्रेल माह की शुरूआत से ही आपके स्वभाव में उग्रता रहेगी, बात बात में झुंझलाहट होगी, लडाई झगडे के आसार बने रहेंगे. इस वजह से आपकी लोकप्रियता में कमी आ सकती है. जीवन साथी का स्वास्थ्य कमजोर बना रह सकता है और दाम्पत्य जीवन में आपसी सामंजस्य में कमी की भी संभावनायें निर्मित हो रही हैं.  मन बाह्य तौर पर किसी विपरीत लिंगी आकर्षण में बंधा रहेंगा, किन्तु आपको यथासंभव इससे बचना चाहिये. प्रेम संबंधों में भी सफ़लता संदिग्ध रहेगी.
यात्रा-भ्रमण के लिए मन लालायित रहेगा और माह के उतरार्ध में आपको इसमें सफ़लता भी मिलेगी. धन का आगमन निरंतर बना रहेगा. 
18 से 26 तारीख के मध्य वाहन दुर्घटना / चोरी अथवा किसी भी प्रकार के लडाई-झगडे के प्रति पूर्णत: सचेत रहें.
शुभ तिथियाँ:-  3,5,7,13,14,27,28
उपाय :-
(1)  शनिवार के दिन काले रंग की गाय को चारा खिलायें 
(2) किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिये घर से प्रस्थान करने के पूर्व दो घूंट जल अवश्य पियें.
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मिथुन राशि:-इस माह का प्रारंभ तो आपके लिए सामान्य ही रहेगा किन्तु परिवार में किसी की अस्वस्थता से मन चिन्तित हो सकता है। सामाजिक,आर्थिक मोर्चे पर भी हल्के तौर पर थोडा समस्यायों का सामना करना पड सकता है. धन आगमन की गति पहले से धीमी ही रहेगी.तारीख 3,8,13,18 को हड़बड़ी, जल्दबाजी में कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय न लें और न ही किसी अति विशेष कार्य को तुरत-फुरत अंजाम दें।
16 अप्रैल से, माह के शुरूआती दिनों की परेशानियों से सबक लेते हुये आपका आत्मिक बल बढेगा और उतरार्ध अवधि में आप मानसिक रूप से बेहद सकून अनुभव करेंगे. भाग्य का अच्छा सहयोग मिलने से आपके अधर में लटके कार्य अनायास ही बनने लगेंगें. परिवार में किसी के स्वास्थ्य को लेकर चली आ रही परेशानी से भी निजात मिलने लगेगी.
शुभ तिथियां:-9,16,21,22,24,29
उपाय :-
(1) पक्षियों को नियमित रूप से दाना डालते रहें
(2) श्री कनकधारा स्त्रोत्र का पाठ करें।
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कर्क राशि:- विद्यार्थियों के लिये यह समय कुछ ठीक नही है. मन में चंचलता बढी रहेगी, स्वभाव में शरारत रहेगी. अत: मन को काबू से संयम में लगायें. परिवार में तनाव रहेगा, धन की कमी भी बनी रहेगी. कारोबार इत्यादि भी मंदी का शिकार रहेगा. संतान के भविष्य संबन्धी विषय में निर्णय लेते समय भी विशेष सावधानी रखनी बेहद आवश्यक है. अन्य पारिवारिक सदस्यों का परामर्श ले लेना ही आपके हित में रहेगा.
व्यय करने की अपनी सीमा को ना भुलाये,खर्च सोच समझकर जरूरत के अनुसार ही करें अन्यथा परेशानी बढ सकती है. मासान्त में लोभवश लाटरी/सट्टे/शेयर मार्किट इत्यादि के जरिए हानि के योग हैं, इनसे यथा संभव दूरी बनाये रखें. हालाँकि जीवन साथी से मधुर संबंध बने रहेंगे. माह के उतरार्ध में भ्रमण मनोरंजन के अवसर भी प्राप्त होंगें.
शुभ तिथियाँ:-4,21,23,24,25,30
उपाय:-
(1) रविवार को उपवास रखें..
(2) अनामिका उंगली में ताँबे का छल्ला धारण करें।
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सिंह राशि:-माह के प्रारंभ मे स्त्री पक्ष से मनमुटाव रहेगा, आप वाणी संयम भी खो सकते हैं अत: कोशीश करके अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें वर्ना परेशानी उठानी पड सकती है. दूसरों को अपनी सलाह देने की आदत को भी काबू में रखें.
माह के प्रारंभ में वाहन और मित्रों के सुख में कमी रहेगी. आप जो बाते उनसे मनवाना चाह रहे हैं, उनके न मानने पर आप काफ़ी व्यथित रहेंगे.
मन में दूसरों के प्रति किसी भी प्रकार की दुर्भावना न रखें अन्यथा आपकी परेशानियां कम होने की अपेक्षा ओर बढने लगेंगी, मन काफ़ी व्यथित रहेगा. 
खर्चे भी इस माह काफी बढे हुये रहेंगे. मन में उदासी एवं स्वभाव में थोडा चिडचिडेपन का अनुभव करेंगें। लेकिन ये स्थितियाँ बहुत अधिक दिनों तक आपको तंग नहीं कर पायेंगीं. माह का उतरार्ध आते आते आप इन सब चिन्ताओं से मुक्ति पा चुके होंगें. मासान्त में आपको यात्रा-भ्रमण के अवसर मिलेंगे, हालाँकि इसमें धन का व्यय तो अवश्य होगा परन्तु घर-परिवार व इष्ट मित्रों से मुलाकात कर जो मानसिक प्रसन्नता प्राप्त कर पायेंगें, वो क्या कम है !
शुभ तिथियाँ:-17,22,24,25,26,27
उपाय :-
(1) शुक्रवार के दिन मिश्री का प्रसाद चढाया करें.
(2) ॐ नारायणाय सुरसिंहासनाय नम: मंत्र का नित्य जाप करें।
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कन्या राशि:- इस माह आप आंतरिक स्तर पर अति क्रियाशील रहेंगे, आपके शत्रु इस माह आपका कुछ नहीं बिगाड पायेंगे. आपको पूर्वालिके अी तिन ी व्यारिकिनाईयों ा सामा करना प रह, उनको आप साम-दाम दंड-भेद इत्यादि ैस ि अपनाते हुये निपटा से में कामाब रहेंगें. कुल मिलाकर इस माह आप अपने व्यवहारिक उद्देश्य को प्राप्त करने में सक्षम रहेंगे.  

हालाँकि माह के उतरार्ध में आपको थोडी परेशानियों का सामना अवश्य करना पड सकता है. पीठ,रीढ की हड्डी अथवा पाँव आदि में दर्द से संबंधित व्याधि पीडा का कारण बन सकती है. भाई-बन्धुओं की ओर से भी थोडा परेशानी रहेगी. कोर्ट कचहरी के मामलों में धन का अपव्यव होना संभावित है. अंक तीन से संबंधित प्रभाव हावी रहेगा.
शुभ तिथियाँ:- 1,2,6,7,9,11,14,15,23
उपाय :- 
(1) भगवान सूर्यदेव को रौली एवं कुशा मिश्रित जल से अर्घ्य दिया करें. 
(2) चँदी का चौकोरुका सैव अपे पास ें.
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तुला राशि :-माह के प्रारंभ में विद्योपार्जन में कठिनाई महसूस करेंगे, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जातकों को प्रयासपूर्वक अध्ययन में मन लगाना चाहिये. आँख/ कान/गला अथवा मुखादि संबंधित विकार थोडा कष्ट-परेशानी उत्पन्न कर सकते हैं, विशेषकर दांतो से संबंधित रोग.
आपकी मानसिकता किसी बडे प्रोजेक्ट को प्लानिंग करने की रहेगी और आप पूर्ण मेहनत से उसमें लगे भी रहेंगे.
 धनागमन रूक रूक कर होता रहेगा पर ईश्वर कृपा से आपके सारे कार्य समय पर बन जायेंगे. माह के उतरार्ध में धन का अचानक आवागमन हो सकता है परंतु आप इसे बचाने में शायद ही सफ़ल होंगे.  इष्ट-मित्रों और विशेष रूप से विपरीत लिंगियों पर धन का भरपूर अपव्यय होगा. पहाडी क्षेत्रों की यात्राओं का अवसर मिलेगा जिनसे आप समुचित लाभ प्राप्त कर सकेंगे. दाम्पत्य जीवन में भी सम्बंधों में मधुरता बरकरार रहेगी.
शुभ तिथियाँ:- 6,7,9,16,19,24,27,29
उपाय:-
(1) मस्तक पर नित्य प्रात: पीले चंदन का तिलक लगाया करें.
(2) शनिवार के दिन नमक अथवा किसी नमकीन वस्तु का दान करते रहें.
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वृश्चिक राशि:- माह के प्रारंभ में आपकी बुद्धि धर्म कर्म में बनी रहेगी, संत समागम होगा इसके बावजूद भी आप मानसिक रूप से स्वयं को थोडा परेशान ही महसूस करेंगें, हालाँकि इस व्यर्थ के मानसिक दबाव/चिन्ता-परेशानी का कोई प्रत्यक्ष कारण भी आप खोज नहीं पायेंगें. 
विद्या प्राप्ति में बाधाओं का योग निर्मित हो रहा रहा है. प्रतियोगी परीक्षाएं दे रहे जातक विशेष मेहनत से ही सफ़लता अर्जित कर पायेंगे.
भाई बहनों की तरफ़ से भी चिंता लगी रहेगी. आर्थिक पक्ष बिना किसी भारी घटा-बढी के सामान्य ही रहने वाला है. जीवनसाथी की ओर से भी उचित साथ-सहयोग मिलता रहेगा. हाँ, ससुराल पक्ष से उपहारादि कोई लाभ प्राप्ति का संयोग अवश्य हैं. माह के उतरार्ध में पहले से हालात कहीं बेहतर होते जायेंगे.
शुभ तिथियाँ:-2,3,12,15,23,29,30 
उपाय :-
(1) नियमित रूप से रूद्राभिषेक करें.
(2) जेब में पूर्ण श्वेत रंग का रूमाल रखें.
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धनु राशि:- माह की शुरुआत परेशानी भरी रहेगी. मन आंदोलित रहेगा. आपको स्वप्रशंसा सुनते रहने की लालसा होगी, जिसका अभाव मन में छटपटाहट एवं चिडचिडापन उत्पन्न करता रहेगा. आप मन में जो कुछ भी विचार करेंगें, उन विचारों को दूसरों के सम्मुख प्रकट करने में दुविधा अनुभव करेंगें.चाहकर भी अपने भाव व्यक्त नहीं कर पायेंगें. आप की मनो दशा केवल योजनाएं बनाने की रहेगी, उन्हें व्यवहारिक रूप में अमली जामा नही पहना सकने की वजह से आप अपने उच्चाधिकारी अथवा व्यापारिक भागीदार का स्वयं पर से विश्वास कम कर रहे हैं. जो भी कार्य करें, भली भान्ति सोच समझकर करें. मन की अपेक्षा बुद्धि से निर्णय लेना ही हितकर रहेगा. 
यदि आप उपरोक्त गतिविधियों से बचे रहे तो माह का उतरार्ध काफ़ी सुखमय रहेगा, घर परिवार की तरफ़ से कोई शुभ समाचार मिलेगा. विवाह योग्य युवक युवतियों को जीवन साथी मिलने की उम्मीद रहेगी.
शुभ तिथियाँ:-16,20,22,24,25,29
 उपाय :-
(1)पीला धागा गले में धारण करें.
(2) बुधवार के दिन भगवती दुर्गा के चरणों में नारियल अर्पित किया करें.
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मकर राशि:- माह के प्रारंभ में पठन पाठन में मन कम लगेगा. हर काम में रूकावटे आने की संभावना रहेगी. परंतु भाईयों के सहयोग से बिगडे काम बन सकेंगे. जीवन साथी से तालमेल बनाये रखेंगे तो आपकी परेशानियां कम रहेंगी.
माह का उतरार्ध काफ़ी अहम साबित होगा. यदि पूर्व में की गई अपनी गलतियों और लापरवाही को आपने नहीं दोहराया तो आप आगे आने वाले अच्छे समय का फ़ायदा उठाने में कामयाब रहेंगे. 
हालाँकि सामान्य तौर पर थोडा स्वास्थ्य से संबंधित कुछ परेशानी उत्पन्न हो सकती हैं. अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखने की कोशीश करें. डाक्टरी सलाह पर अमल करते रहें. धन का उचित लाभ मिलता रहेगा. 
माँस मदिरा इत्यादि तामसिक अभक्ष्य पदार्थों का सेवन न करना ही आपके हित में रहेगा.
शुभ तिथियाँ:-11,15,17,19,26,27
उपाय :-
1. मंगलवार के दिन लाल गुलाब के 27 पुष्पों की माला श्री हनुमान जी को अर्पित किया करें.
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कुंभ राशि:- यह माह आपके लिए मिश्रित फलदायी रहने वाला है. इस समयावधि में आप चाहे किसी का कितना भी सहयोग कर लें, किन्तु आपको उसका उचित प्रतिफ़ल नही मिलने वाला. साथ जुडने वाला प्रत्येक व्यक्ति बिना आपके हानि-लाभ का विचार किए सिर्फ अपना काम निकालकर चलता बनेगा और आप बस ठगे से देखते रहेंगें. सो, किसी को नजदीक आने दें, तो बेहद सोच-विचारकर ही. 
आपके स्वभाव में पूर्ण रूप से भौतिकता छाई रहेगी. आध्यात्मिक पक्ष बेहद कमजोर रहेगा. माह का पूर्वार्ध भी थोडा कशमकश भरा रहने वाला है. त्वरित लाभ की अकांक्षा से सट्टे/शेयर मार्किट से दूरी बनाकर चलना ही हितकर रहेगा, विशेष रूप से वायदा बाजार में सोने सम्बंधी व्यापार भूल से भी न करें अन्यथा हानि का सामना करने हेतु तत्पर रहें. यदि आप किसी प्रकार की अचल सम्पत्ति खरीदने की योजना बना रहे हैं तो उसके लिए यह समय पूर्णत: उपयुक्त है.
माह का उतरार्ध आपके लिए पूर्वार्ध से कहीं अधिक लाभकारी रहने वाला है. घर-परिवार में सुख एवं शान्ति का माहौल बना रहेगा. किए जा रहे प्रयासों में सफलता के दर्शन होने लगेंगें.
शुभ तिथियाँ:-8,16,19,20,24,27,28
 उपाय :- 
(1) सोमवार के दिन दूध, चावल का दान किया करें. 
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मीन राशि:- माह के पूर्वार्ध में आपकी विचारधारा थोडा नास्तिकता का पुट लिये होगी. हालाँकि इस संबंध में आपके अपने ही कुछ तर्क होंगे. मन पूरी तरह से भौतिकता के अधीन रहेगा. 
निज भाई-बन्धुओं का साथ स्नेह आप पर यथावत बना रहेगा और आपस में अच्छा तालमेल रहेगा, उनसे आपको उचित सहयोग भी मिलता रहेगा.
14 अप्रैल पश्चात का समय आपको विशेष सावधानी से गुजारना होगा. जीवनसाथी के साथ तालमेल बना कर चलेंगें तो अच्छा रहेगा. किसी को धन बहुत सोच समझकर ही उधार दें अन्यथा धन भी जाएगा ओर संबंधों में भी बिगाड उत्पन होने का भय है. धन के आगमन का पक्ष तो सुदृड बना रहेगा किन्तु साथ-साथ संतान पक्ष के जरिये व्यय की मात्रा भी उसी रूप में बढी रहेगी. 
शुभ तिथियाँ:-2,7,15,16,19,23
उपाय :- 
(1) ब्राह्मण को नित्य नमस्कार करें.
(2) ॐ गं गणपतये नम: मन्त्र का मानसिक जाप करते रहें. 
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नोट:- राशिफल जन्मकालिक चन्द्रराशि पर आधारित है

Pandit Dinesh 30 March, 2013
मीन लग्न और समस्या निवारक उपाय

जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हर इन्सान किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है , जिनमें से एक होती है--व्यक्ति सम्बंधी समस्या जैसे अपने बारे में/अपनी पत्नि/संतान के बारे में,संतान होने या न होने इत्यादि के बारे में, दूसरी स्थान सम्बंधी मसलन किसी स्थान विशेष जैसे जमीन, जायदाद, मकान, व्यवसाय, नौकरी आदि की समस्या और तीसरी धातु अर्थात धन सम्बंधी समस्या. जीवन में आने वाली इन समस्यायों हेतु प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने तरीके से उपाय भी करता है, जिससे कि जीवन को सुखपूर्वक भोगा जा सके.
यहाँ हम आपको आपके जन्म लग्नानुसार कुछ ऎसे ही उपायों की जानकारी दे रहे हैं, जिससे कि आप भी अपनी विभिन्न समस्यायों से सरलतापूर्वक एवं शीघ्रता से निजात पा सकते हैं.   

आर्थिक समस्या निवारण हेतु

यदि आप आजीविका के क्षेत्र में बारबार अवरोध अनुभव कर रहे हैं, कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग से सम्बंधों में बिगाड उत्पन्न हो रहा हो अथवा पिता से तनावपूर्व स्थितियों का सामना करना पड रहा हो, तो इसके निवारणार्थ किसी भी द्वितीया/सप्तमी/द्वादशी तिथि से आरंभ कर नियमित रूप से सवा माह लगातार भगवान शिव की प्रतिमा के सम्मुख ग्यारह जपा कुसुम( अडहुल/ Chinese Rose) के पुष्प चढाकर श्री रूद्राष्टाध्यायी का पाठ करें.
इसके अतिरिक्त घर अथवा कार्यस्थल की उतर-पश्चिम दिशा में सफेद पुष्पों के पौधे लगायें एवं संभव हो तो संयुक्त परिवार में ही निवास करें.
यदि जन्मकुंडली में बृहस्पति नीच अथवा कुंभ राशि में न हो तो सवा 5 रत्ती वजन का पुखराज रत्न भी स्वर्ण धातु में धारण कर सकते है.
केवलमात्र सिर्फ इस एक उपाय के करने से ही आप देखेंगें कि जहाँ एक ओर आपकी आमदनी के स्त्रोत खुलने लगे हैं, वहीं सामाजिक संबंधों में भी मधुरता की अभिवृद्धि होने लगी है.

भाग्योन्नति हेतु

यदि आपको भाग्योन्नति में बार-बार अवरोध कि स्थितियों का सामना करना पड रहा है, अथवा आपका प्रत्येक कार्य सफलता के समीप आकर रूक जाता हो, तो उसके लिए आप ये एक कार्य कीजिए, कि सर्वप्रथम स्वर्णमंडित गौरीशंकर रूद्राक्ष अथवा स्वर्ण की बनी शंखाकृति गले में धारण करें.
तत्पश्चात नित्य प्रात: स्नानादि पश्चात किसी पात्र में जल भरकर अपने सम्मुख रखें और निम्न मन्त्रोच्चारण पश्चात उस जल को किसी पीपल के वृक्ष को अर्पित कर दें .
   ॐ लां इन्द्राय देवाधिपतये नमः ।
        ॐ रां अग्नये तेजाधिपतये नमः।
        ॐ यां यमाय प्रेताधिपतये नमः ।
        ॐ क्षां निऋत्ये रक्षोधिपतये नमः ।
        ॐ वां वरुणाय जलाधिपतये नमः ।
        ॐ यां वायवे प्राणाधिपतये नमः ।
        ॐ सां सोमाय ताराधिपतये नमः ।
        ॐ हां ईशानाय गणाधिपतये नमः ।
        ॐ आं ब्रह्मणे प्रजाधिपतये नमः ।
        ॐ ह्रीं अनन्ताय नागाधिपतये नमः

केवलमात्र इसी उपाय के करने से आप देखेंगें कि शनै: शनै: आपके भाग्य के समस्त अवरोध मिटकर जीवन में एक नई उर्जा, शान्ति एवं स्थायी सुख-समृद्धि का समावेश होने लगा हैं.

सम्पत्ति, वाहन सुख प्राप्ति हेतु

यदि आप जमीन-जायदाद, नजदीकी सगे सम्बन्धियों अथवा वाहन सम्बंधी किसी प्रकार की कोई समस्या/कष्ट का सामना कर रहे हैं, तो इसके लिए कम से कम 12 रविवार लगातार उपवास रखें और सूर्योदय से मध्यांह की अवधि के बीच में किसी निर्धन व्यक्ति को सवा किलो गेहूँ का दलिया दान करें.  
इसके साथ ही शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को श्वेत वस्त्र में सफेद आक के 5 फूल, दो त्रिमुखी रूद्राक्ष, चावल और पारद शिवलिंग बाँधकर घर के पूजास्थल में स्थापित करें एवं नित्य प्रात: श्री सूर्य गायत्री " ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य प्रचोदयात " का जाप किया करें.
यदि आप विधिपूर्वक उपरोक्त उपाय को सम्पन्न कर सकें तो समझिए कि आप सम्पत्ति,वाहन अथवा सामाजिक व्यवहार एवं य़श-मान सम्बन्धी बहुत सी समस्यायों से बेहद आसानी से मुक्ति पा सकेंगें. 

सुरूचिपूर्ण जीवन हेतु

यदि आप जीवन में बार-बार परेशानी एवं दैनिक कार्यों में व्यवधान अनुभव कर रहे हों, तो आपको प्रतिदिन सुबह अपने इष्टदेव के सम्मुख गाय के शुद्ध घी का दीपक अवश्य जलाते रहना चाहिए.
यदि आपकी जन्मकुंडली में चन्द्रमा नीच राशि में स्थित न हो तो आप सवा 7 रत्ती का चन्द्रकान्त मणि (Moon Stone ) दाहिने हाथ की अनामिका (Ring Finger) अंगुली में धारण कर सकते हैं अन्यथा शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन एक द्विमुखी रूद्राक्ष गले में धारंण करें.
इसके साथ ही नियमपूर्वक प्रत्येक रविवार भगवान भुवनभास्कर का स्मरण कर थोडा कच्चा दूध और गुड  किसी धार्मिक स्थल अथवा किसी निर्धन व्यक्ति को दान करते रहें, तो इन उपायों से जहाँ एक ओर आपका जीवन सुगम होगा, वहीं आपको जीवन में अनायास उत्पन हो रही कईं प्रकार की परेशानियों एवं बाधाओं से भी सहज रूप में ही मुक्ति मिलने लगेगी.

पारिवारिक कलह मुक्ति एवं दाम्पत्य सुख प्राप्ति हेतु

यदि आप दाम्पत्य जीवन में व्यवधान यथा पति-पत्नि में विवाद, वैचारिक मतभेद, अशान्ती जन्य किन्ही कष्टों का सामना कर रहे हैं तो उसकी निवृति एवं आपसी सामंजस्य की अभिवृद्धि हेतु आपको नियमित रूप से रात को सोने से पूर्व बिस्तर पर बैठकर ही 12 बार " नमोस्तु पुष्पबाणाय जगदानन्द कारिणे ! मन्मथाय जगन्नेत्र रतिप्रीतिप्रदायिने !! " मन्त्र का जाप करते रहना चाहिए.
न्यूनतम 40 दिन लगातार केसर मिश्रित नारियल जल द्वारा में  भगवान शिव का अभिषेक करें.

इसके अतिरिक्त यदाकदा 9 वर्ष से कम उम्र की कन्यायों को मिष्ठान्न खिलाते रहें तो समझिए कि अब आपके दाम्पत्य जीवन में परस्पर प्रेम, माधुर्य एवं शान्ती का समावेश होने लगा है.
* एक बात का विशेष तौर पर ध्यान रखें कि अपना श्यनकक्ष ( Bedroom ) कभी भूलकर भी घर के वायव्य कोण अर्थात उत्तर-पश्चिम (North-West) दिशा में न बनायें अन्यथा दम्पत्ति में आपसी सामंजस्य का अभाव सदैव बना ही रहेगा. 

भय, मानसिक तनाव एवं ऋण से मुक्ति हेतु

यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीडित हैं, अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं या फिर कहीं ऋण के बोझ से पीडित हैं तो उसके लिए सर्वप्रथम कम से कम 8 शुक्रवार लगातार किसी धार्मिक स्थल पर सवा 2 मीटर जामुनी रंग का कपडा और 250 ग्राम पंचमेवा चढायें. साथ ही वर्ष में कम से कम 2 बार अर्थात हर छ: माह की अवधि पश्चात किसी भिखारी को अपना पुराना वस्त्र अवश्य दान किया करें. 
अपने भवन की दक्षिण दिशा की दीवार पर लाल रंग के पेंट द्वारा "कलश" का एक चित्र बनवायें अथवा इस दिशा में छत पर कलश की आकृति युक्त एक लाल रंग का तिकोणा ध्वज लगायें.
प्रत्येक मंगलवार भगवान गणपति जी के सम्मुख तिलों के तेल का दीपक प्रज्जवल्लित कर उन्हे मीठे पान का भोग लगाया करें.

इन साधारण से उपायों से एक ओर जहाँ आप मानसिक तनाव/भय/दबाव/चिन्ता इत्यादि से मुक्त हो पायेंगें, वहीं आपकी आय में वृद्धि के साथ ही ऋण से मुक्त होने की परिस्थितियाँ भी निर्मित होने लगेंगीं. 

Pandit Dinesh 29 April, 2012
कुंभ लग्न और समस्या निवारक उपाय

जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हर इन्सान किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है , जिनमें से एक होती है--व्यक्ति सम्बंधी समस्या जैसे अपने बारे में/अपनी पत्नि/संतान के बारे में,संतान होने या न होने इत्यादि के बारे में, दूसरी स्थान सम्बंधी मसलन किसी स्थान विशेष जैसे जमीन, जायदाद, मकान, व्यवसाय, नौकरी आदि की समस्या और तीसरी धातु अर्थात धन सम्बंधी समस्या. जीवन में आने वाली इन समस्यायों हेतु प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने तरीके से उपाय भी करता है, जिससे कि जीवन को सुखपूर्वक भोगा जा सके.
यहाँ हम आपको आपके जन्म लग्नानुसार कुछ ऎसे ही उपायों की जानकारी दे रहे हैं, जिससे कि आप भी अपनी विभिन्न समस्यायों से सरलतापूर्वक एवं शीघ्रता से निजात पा सकते हैं.   

आर्थिक समस्या निवारण हेतु

यदि आप आजीविका के क्षेत्र में बारबार अवरोध अनुभव कर रहे हैं, कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग से सम्बंधों में बिगाड उत्पन्न हो रहा हो अथवा पिता से तनावपूर्व स्थितियों का सामना करना पड रहा हो, तो इसके लिए सर्वप्रथम अपने घर एवं कार्यस्थल दोनो जगह पर चाँदी के किसी पात्र में शहद भरकर स्थापित करें.
किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि के दिन श्री विष्णु मन्दिर में श्वेत वस्त्र का बना एक ध्वज अर्पित करें.
शनिवार के दिन चाँदी और स्वर्ण मिश्रित धातु का छल्ला मध्यमा अंगुली में तथा स्वर्ण मंडित तेरहमुखी रूद्राक्ष गले में धारण करें.
नियमपूर्वक प्रत्येक बुधवार एक नारियल और 11 छुआरे देवी मन्दिर में अर्पित किया करें.  
इसके अतिरिक्त यदि आपको व्ययाधिक्य के कारण किन्ही आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड रहा हो, तो उसकी निवृति के लिए टोपी/पगडी/वस्त्र आदि से सिर को ढाँपकर गुरूवार के दिन किसी पीपल के वृक्ष की 9 परिक्रमा अवश्य किया कीजिए. 
केवलमात्र सिर्फ इन चन्द उपायों के करने से ही आप देखेंगें कि जहाँ एक ओर आपकी आमदनी के स्त्रोत खुलने लगे हैं, वहीं सामाजिक संबंधों में भी मधुरता की अभिवृद्धि होने लगी है.

भाग्योन्नति हेतु

यदि आपको भाग्योन्नति में बार-बार अवरोध कि स्थितियों का सामना करना पड रहा है, अथवा आपका प्रत्येक कार्य सफलता के समीप आकर रूक जाता हो, तो उसके लिए आपको केवलमात्र सिर्फ एक उपाय करना है कि किसी भी माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन परिवार के समस्त सदस्यों को साथ लेकर आप गंगास्नान करें.
तत्पश्चात जीवन पर्यन्त प्रत्येक अमावस्या के दिन किसी सुयोग्य विद्वान ब्राह्मण को घर बुलाकर भोजन अवश्य कराते रहें.
केवलमात्र इसी उपाय के करने से आप देखेंगें कि शनै: शनै: आपके भाग्य के समस्त अवरोध मिटकर जीवन में एक नई उर्जा, शान्ति एवं स्थायी सुख-समृद्धि का समावेश होने लगा हैं.

सम्पत्ति, वाहन सुख प्राप्ति हेतु

यदि आप जमीन-जायदाद, नजदीकी सगे सम्बन्धियों अथवा वाहन सम्बंधी किसी प्रकार की कोई समस्या/कष्ट का सामना कर रहे हैं, तो इसके लिए आपको 16 सोमवार लगातार सवा 2 किलो कच्चा दूध और हरा हकीक रत्न किसी नदी/ नहर इत्यादि बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए.
इसके साथ ही शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को श्वेत वस्त्र में दो छ:मुखी रूद्राक्ष और चाँदी का छोटा सा त्रिशूल बाँधकर घर के पूजास्थल में स्थापित करें एवं नित्य प्रात: श्री शिव चालीसा का पाठ अवश्य किया करें.
यदि आप विधिपूर्वक उपरोक्त उपाय को सम्पन्न कर सकें तो समझिए कि आप सम्पत्ति,वाहन अथवा सामाजिक व्यवहार एवं य़श-मान सम्बन्धी समस्त समस्यायों से बेहद आसानी से मुक्ति पा सकेंगें. 

सुरूचिपूर्ण जीवन हेतु

यदि आप जीवन में बार-बार परेशानी एवं दैनिक कार्यों में व्यवधान अनुभव कर रहे हों, तो आपको प्रतिदिन सुबह अपने इष्टदेव के सम्मुख तिलों के तेल का दीपक अवश्य जलाते रहना चाहिए.
यदि आपकी जन्मकुंडली में शुक्र नीच राशि में स्थित न हो तो आप सवा 7 रत्ती का अमेरिकन डायमंड  दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कर सकते हैं अन्यथा शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन एक नवमुखी रूद्राक्ष गले में धारंण करें.
प्रत्येक सक्रान्ति को परिवार के समस्त सदस्यों का हाथ लगवाकर सवा किलो कच्ची खिचडी किसी भिखारी को दान करते रहें, तो इन उपायों से जहाँ एक ओर आपका जीवन सुगम होगा, वहीं आपको जीवन में अनायास उत्पन हो रही कईं प्रकार की परेशानियों एवं बाधाओं से भी सहज रूप में ही मुक्ति मिलने लगेगी.

पारिवारिक कलह मुक्ति एवं दाम्पत्य सुख प्राप्ति हेतु

यदि आप दाम्पत्य जीवन में व्यवधान यथा पति-पत्नि में विवाद, वैचारिक मतभेद, अशान्ती जन्य किन्ही कष्टों का सामना कर रहे हैं तो उसकी निवृति एवं आपसी सामंजस्य की अभिवृद्धि हेतु आपको नियमित रूप से श्री सूर्य गायत्री का पाठ करना चाहिए.
कम से कम 12 रविवार लगातार भगवान शिव का अभिषेक कर शिवलिंग पर गौ घृत मिश्रित लाल रक्त चन्दन का लेप लगायें.
धर्मपत्नि को वर्ष में कम से कम दो बार कुछ दिनो के लिए अपने पीहर (मायके) भेजें.
पति 24 या 32 ग्राम वजन का चाँदी का कडा तथा पत्नि लाख की चूडी अवश्य धारण किये रहे तो समझिए आपके दाम्पत्य जीवन में परस्पर प्रेम, माधुर्य एवं शान्ती का समावेश होने लगा है.
* एक बात का विशेष तौर पर ध्यान रखें कि अपना श्यनकक्ष ( Bedroom) कभी भूलकर भी घर के नैऋत्य कोण अर्थात दक्षिण-पश्चिम ( South-West) दिशा में न बनायें अन्यथा आपसी तनाव की सदैव बनी ही रहेगी. 

भय, मानसिक तनाव से मुक्ति हेतु

यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीडित हैं, अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं तो उसके लिए सर्वप्रथम किसी भिखारी को शनिवार अथवा बुधवार के दिन नीला वस्त्र और चमडे की जूती/चप्पल दान करें.
अपने भवन की उत्तर दिशा में सफेद हंस की एक पत्थर की प्रतिमा स्थापित करें.
सोते समय सिरहाने एक चुटकी भर सुहागा लाल कागज की पुडिया में बाँधकर रखे रहें.
इन साधारण से उपायों से एक ओर जहाँ आपको मानसिक तनाव/भय/दबाव इत्यादि से मुक्ति मिलने लगेगी, वहीं परिवार के अन्य सदस्यों की भिन्न-भिन्न विचारधाराओं से मन में उपजने वाली उदासीनता एवं वैमनस्य का भाव भी जागृत नहीं हो पायेगा.

Pandit Dinesh 11 April, 2012